हज में क्या होता है महरम का मतलब?

Published by: एबीपी लाइव
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हज यात्रा में महरम एक विशेष व्यक्ति होता है

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यह व्यक्ति मुस्लिम महिला के साथ उसकी यात्रा पर जाता है और उसकी रस्में पूरी करने में मदद करता है

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महरम मूल रूप से महिला का एक पुरुष रिश्तेदार होता है जो उसका पति, पिता, बेटा या भाई हो सकता है

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इस्लामी शरीयत के मुताबिक अगर किसी महिला को हज पर जाना है तो उसके साथ किसी पुरुष संरक्षक का जाना जरूरी होता है

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साथ ही हज यात्रा में पुरुष संरक्षक का महरम होना शर्त है

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वहीं इस्लामी शरीयत में महरम उस करीबी रिश्तेदार को भी कहते हैं, जिसके साथ किसी भी स्थिति में निकाह (शादी) जायज नहीं हो

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इसमें पति, पिता, बेटा, भाई, दादा, नाना, पोता, नाती जैसे रिश्ते शामिल हैं

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हालांकि हज नीतियों के मुताबिक 45 वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाएं जिनके पास महरम ना हों वह हज पर जा सकती हैं

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यह महिलाएं बिना महरम के चार या ज्यादा संख्या में महिलाओं के समूह के साथ हज पर जा सकती हैं

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