महिलाओं के लिए कैसे तय हुआ पिंक कलर

Published by: एबीपी लाइव
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पिंक का महिलाओं से जुड़ना, उम्मीद से कहीं ज्यादा पुरानी और गहरी कहानी है

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20वीं सदी से पहले पिंक कलर को 'छोटा लाल' माना जाता था

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इसे लड़कों के लिए शक्तिशाली व साहसी रंग माना जाता था

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ज्यादा बिक्री के लिए 1940 में कंपनियों ने जेंडर के आधार पर रंगों का बंटवारा शुरू कर दिया

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1953 में फर्स्ट लेडी मैमी आइजनहावर ने पिंक गाउन पहनकर इसे महिलाओं का 'पावर कलर' बना दिया

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WW2 के बाद महिलाओं को दोबारा घरेलू दिखाने के लिए पिंक को एक 'ब्रैंड' की तरह इस्तेमाल किया गया

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1959 में 'बार्बी' के आते ही पिंक पूरी तरह लड़कियों का सिग्नेचर कलर बन गया

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टाइपिस्ट और नर्स जैसी 'पिंक कॉलर' जॉब्स ने इस रंग को महिलाओं की प्रोफेशनल पहचान बना दी

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90s के 'पिंक रिबन' ने इस रंग को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस और महिला एकजुटता की ग्लोबल पहचान बना दी

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