इसे मुख्य रूप से घर के कचरे, सब्ज़ियों के छिलकों और गाय के गोबर से बनाया जाता है
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ऑर्गेनिक कचरे और पानी के मिश्रण को एक ड्रम या टैंक में डाला जाता है और हवा-रहित (एनारोबिक) स्थिति में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है, जिससे गैस निकलती है
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पुराने ड्रमों का इस्तेमाल करके, इस यूनिट को 500-1,500 रुपये में बनाया जा सकता है, जबकि नई सामग्री का इस्तेमाल करने पर इसकी लागत लगभग 5,000 रुपये आ सकती है
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सिस्टम लगाने के बाद, पहला बैच तैयार होने में 15 से 25 दिन लग सकते हैं
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इस बायोगैस का प्रेशर LPG से कम होता है, लेकिन यह चाय, नाश्ते और हल्के खाने के लिए बहुत बढ़िया है
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छोटे पैमाने पर यह सुरक्षित है, लेकिन गैस लीक की जांच करना और टैंक के अच्छी तरह से बंद होने को सुनिश्चित करना ज़रूरी है
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सरकार बायोगैस प्लांट लगाने के लिए सब्सिडी भी देती है, जो 9,800 रुपये से लेकर 70,400 रुपये तक हो सकती है
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प्लास्टिक ड्रम वाली यूनिटें आमतौर पर 5 से 10 साल चलती हैं, जबकि बड़े Syntex टैंक 20-30 साल तक चल सकते हैं
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यह ऑर्गेनिक कचरे का कुशलता से प्रबंधन करता है और पर्यावरण के लिए ऊर्जा का एक टिकाऊ स्रोत है