इन्होंने श्रद्धा, भक्ति, पौराणिक ग्रंथों पर लिखकर लोगों के मन से कई संदेह और सहजता को सरलता से दूर किया है.

देवदत्त पटनायक विशेषतौर पर पौराणिक कथाओं और धार्मिक ज्ञान को नए तरीके से प्रस्तुत करने की कला के कारण जाने जाते हैं.

धर्म, धार्मिक ग्रंथ, पुराण, शास्त्र इतिहास और भारतीय विचारधारा के प्रति गहरी रुचि होने के कारण इन्होंने इस पर अध्ययन किया और लेखक बन गए.

देवदत्त पटनायक की कई किताबें बेस्टसेलर हैं पटनायक का जन्म उड़ीसा में हुआ.

मुंबई में पले-बढ़ें और डॉक्टरी की पढ़ाई की , मुंबई यूनिवर्सिटी से तुलनात्मक पौराणिकी का कोर्स किया.

14 साल तक डॉक्टरी क्षेत्र से जुड़े रहते हुए इन्होंने साथ ही साथ वेद-पुराण से जुड़े विषयों पर लेख और पुस्तक भी लिखीं

इनकी पहली पुस्तक ‘शिवा: इन इंट्रोडक्शन’ 1997 में प्रकाशित हुई थी

देवदत्त पटनायक की किताबों की खास बात यह है कि, ये अपनी सभी किताबों में चित्र भी खुद ही बनाते हैं

देवदत्त पटनायक की किताबें हिंदी, तमिल, तेलुगू, गुजराती और मराठी भाषा में अनुवाद किया गया

देवदत्त पटनायक की बेस्टसेलर पुस्तकों में कथा, प्रबंध, उपन्यास और बच्चों की किताबें भी शामिल हैं.