शब-ए-बारात को इस्लाम की

चार महत्वपूर्ण रातों में एक है.

इसे मगफिरत की रात कहते हैं, जो शाबान महीने

की 14वीं और 15वीं रात होती है.

शब-ए-बारात की पूरी रात मुसलमान दुआ, तिलावत

और गुनाहों से तौबा करते हैं.

माना जाता है कि, इस रात अल्लाह अपने बंदों

की ख्वाहिशें पूरी करते हैं.

शब-ए-बारात इस्लामी कैलेंडर की उन चुनिंद रातों में एक है,

जब रहमत और बरकत नाजिल होती है.

मुसलमानों को इन मुकद्दस और पाक रातों का

बेसब्री से इंतजार रहता है.

शब-ए-बारात सहित इस्लाम में चार

पवित्र रातों का जिक्र मिलता है.

आशूरा की रात, शब-ए-मेराज की रात, शब-ए-बारात की रात

और शब-ए-कद्र की रात.