महाकुंभ आकर्षण का केंद्र रहने वाले नागा साधु
नग्न अवस्था में नजर आते हैं.


अक्सर आपने देखा होगा कि नागा साधु शरीर
पर राख लेपेट हुए दिखाई देते हैं.


नागा साधु बनने वाले नए सदस्य एक लंगोट के
अलावा कुछ नहीं पहनते.


कुंभ मेले में अंतिम प्रण लेने के बाद वे लंगोट भी त्याग
देते हैं और जीवन भर यूं ही रहते हैं.


नागा साधु प्रकृति और प्राकृतिक अवस्था को महत्व देते हैं.
इसलिए भी वे वस्त्र नहीं पहनते हैं.


नागा साधुओं का मानना है कि इंसान निर्वस्त्र जन्म
लेता है अर्थात यह अवस्था प्राकृतिक है.


नागा साधु कठिन तपस्या और योग से शरीर को इतना
मजबूत बना लेते हैं.


यही वजह है कि भयंकर सर्दी में भी उन्हें ठंड नहीं लगती.