काल भैरव अष्टमी की रात तामसिक भोजन, लहसुन

प्याज और मांसाहार से पूरी तरह दूर रहें.

Published by: अणिमा शुक्ला
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मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए किसी

भी तरह के नशे या गलत आदतों का त्याग करें.

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मन को शांत रखें; इस रात गुस्सा, वाद

विवाद और अपशब्द बोलने से बचें.

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पूजा, दीपक या मंत्र जाप का जो भी नियम

लें, उसे बीच में अधूरा न छोड़ें.

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भैरव जी के सामने सरसों के तेल का दीपक

जलाकर विधि-विधान से पूजा करें.

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'ॐ भैरवाय नमः' मंत्र का जाप करें, जिससे नकारात्मकता

दूर होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा.

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भैरव जी के वाहन (काले कुत्ते) को भोजन

कराकर उनका विशेष आशीर्वाद पाएं.

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इस पूरी रात को केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि पूर्ण

संयम और सच्ची आस्था के साथ बिताएं.

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शांत चित्त होकर भैरव बाबा से अपने जीवन के

संकटों और डर को दूर करने की प्रार्थना करें.

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