व्यक्ति जैसा अन्न खाता है उसका मन वैसा ही हो जाता है.
गरुड़ पुराण में भोजन के खास नियम बताए गए हैं.


गरुड़ पुराण के अनुसार अपराधी या चोर के घर भोजन
करना अच्छा नहीं माना गया है.


ऐसे लोग पाप की कमाई कर अपना जीवन यापन करते हैं.



अनैतिक कार्य से कमाया धन, अन्न कभी पचता नहीं है.
ऐसा भोजन हमें पाप का भागीदार बनाता है.


कोई व्यक्ति छूत के रोग का मरीज हो तो उसके घर भी
भोजन नहीं करना चाहिए, ऐसा गरुड़ पुराण में बताया है.


गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों का घर के वातावरण में कीटाणु
हो सकते हैं जो आपके स्वास्थ के लिए अच्छे नहीं है.


जो व्यक्ति ईश्वर की निंदा करता हो या अधार्मिक
आचरण करता हो. इनके यहां भी भोजन न करें.


ऐसे व्यक्ति के यहां भोजन ग्रहण करने से समाज में
अपयश का सामना करना पड़ता है.