(हरिशयनी) एकादशी का व्रत रखा जाएगा.
तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि चालू होगी.
की प्रदोषकाल में पूजा करना भी शुभ माना जाता है.
खीर, माखन-मिश्री, फल और सूखे मेवे चढ़ाए.
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और तुलसी पूजन जरूर करें.
शराब और तामसिक भोजन का सेवन न करें.
रखें और मन, वचन व कर्म से संयम बनाए रखें.
भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं.
को भोजन का दान शुभ फलदायी माना जाता है.
पारण समय में भगवान विष्णु की पूजा के बाद करें.