Kanwar Yatra Nameplate Row: UP-UK सरकार के आदेश पर सियासी संग्राम, ST Hasan-Owaisi का हमला
एबीपी न्यूज़ डेस्क | 02 Jul 2025 05:06 PM (IST)
कांवड़ यात्रा के दौरान खानपान और दुकानदारों की पहचान को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के आदेशों पर सियासी और कानूनी विवाद जारी है। पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर चलने वाली हर दुकान पर नेम प्लेट और दुकानदार का नाम लिखने के आदेश दिए थे। अब उत्तराखंड सरकार ने भी खाने-पीने की दुकानों पर मालिक का नाम, अनिवार्य लाइसेंस और पहचान पत्र दिखाना जरूरी बताया है। सरकार का तर्क है कि यह फैसला कांवड़ यात्रा में यात्रियों की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है, ताकि मिलावट और संदिग्ध गतिविधियों को रोका जा सके। पिछले समय में ठोक हाथ जैसी घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।
इस फैसले पर समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के रूप में देखा जाना चाहिए, जहां आतंकवादियों ने धर्म देखकर लोगों को मारा था। एसटी हसन ने सवाल उठाया, "इनमें और उन आतंकवादियों में कोई फर्क है जिन्होंने धर्म पूज के पहलगाम के अंदर गोलियां मारी थीं? यह भी एक तरह के आतंकवादी हैं और वह भी आतंकवादी थे।" उन्होंने आरोप लगाया कि यह देश के दुश्मनों का एजेंडा है जो हिंदू-मुसलमान करके आबादी को बांटना चाहते हैं और देश को कमजोर करना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हिंदू संगठनों द्वारा चलाए गए अभियान के दौरान दुकानदारों और कर्मचारियों के कपड़े उतरवाने के आरोपों पर असदुद्दीन ओवैसी ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि ये कौन से विजिलेंस ग्रुप्स हैं और क्या ये सरकार चला रहे हैं? ओवैसी ने पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े किए। हालांकि, एसटी हसन ने बाद में स्पष्ट किया कि उन्हें नेम प्लेट लगाने के सरकारी आदेश पर कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि इस्लाम भी व्यापार में धोखा न देने की सीख देता है। लेकिन उन्होंने छोटे दुकानदारों पर 2,00,000 रुपये के जुर्माने के प्रावधान को बहुत ज्यादा बताया।
इस फैसले पर समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के रूप में देखा जाना चाहिए, जहां आतंकवादियों ने धर्म देखकर लोगों को मारा था। एसटी हसन ने सवाल उठाया, "इनमें और उन आतंकवादियों में कोई फर्क है जिन्होंने धर्म पूज के पहलगाम के अंदर गोलियां मारी थीं? यह भी एक तरह के आतंकवादी हैं और वह भी आतंकवादी थे।" उन्होंने आरोप लगाया कि यह देश के दुश्मनों का एजेंडा है जो हिंदू-मुसलमान करके आबादी को बांटना चाहते हैं और देश को कमजोर करना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हिंदू संगठनों द्वारा चलाए गए अभियान के दौरान दुकानदारों और कर्मचारियों के कपड़े उतरवाने के आरोपों पर असदुद्दीन ओवैसी ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि ये कौन से विजिलेंस ग्रुप्स हैं और क्या ये सरकार चला रहे हैं? ओवैसी ने पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े किए। हालांकि, एसटी हसन ने बाद में स्पष्ट किया कि उन्हें नेम प्लेट लगाने के सरकारी आदेश पर कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि इस्लाम भी व्यापार में धोखा न देने की सीख देता है। लेकिन उन्होंने छोटे दुकानदारों पर 2,00,000 रुपये के जुर्माने के प्रावधान को बहुत ज्यादा बताया।