Hindi Imposition: Raj Thackeray का 'हिंदी थोपने' पर वार, सरकार का U-turn!
एबीपी न्यूज़ डेस्क | 05 Jul 2025 01:58 PM (IST)
एक वक्ता ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की त्रिभाषा नीति पर सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा त्रिभाषा नीति को आगे बढ़ाने के लिए लाए गए प्रस्ताव और बाद में ठाकरे बंधुओं के विरोध के कारण सरकार द्वारा यू-टर्न लेने पर राज ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। वक्ता ने कहा कि यह मराठी लोगों की एकता की तस्वीर है जो इस मंच पर दिख रही है और कोई दूसरा एजेंडा नहीं, सिर्फ मराठी ही एजेंडा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी पर हिंदी थोपी नहीं जा सकती और छोटे बच्चों पर हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है। वक्ता ने सरकार के फैसले को वापस लेने का श्रेय अपने दबाव को दिया। उन्होंने बाला साहेब ठाकरे के मराठी प्रेम पर सवाल उठाने वालों को भी जवाब दिया, यह कहते हुए कि बाला साहेब ठाकरे ने मराठी व्यक्ति को ही मुख्यमंत्री बनाने पर जोर दिया था। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जहां बाला साहेब ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद के लिए एक गैर-मराठी व्यक्ति के नाम पर विचार करने से इनकार कर दिया था और कहा था, 'मराठी सोइं? मराठी आदि होगा दूसरा कोई? मराठी?' वक्ता ने लालकृष्ण आडवाणी, जयललिता, ए आर रहमान जैसे कई नेताओं और कलाकारों के उदाहरण दिए जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की और पूछा कि क्या उनके हिंदुत्व या भाषा प्रेम पर सवाल उठाया जाएगा। उन्होंने दक्षिण भारत के नेताओं का भी जिक्र किया जो भाषा के विषय पर एक होकर विरोध करते हैं। वक्ता ने जाति के नाम पर राजनीति करने और मारपीट करने की प्रवृत्ति की निंदा की। उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा करने वाले रेजिमेंट भाषा के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी पहचान के आधार पर काम करते हैं। उन्होंने मराठी अभिमान और महाराष्ट्र की पहचान पर किसी भी तरह के समझौते से इनकार किया।