सीवर साफ करने वाले लड़के और सब्जी बेचने वाली की अनोखी कहानी!
यह बातचीत एक ऐसी फिल्म की Journey बताती है जो सिर्फ cinema नहीं, बल्कि reality से निकली कहानी है। फिल्म की Lead एक्ट्रेस बताती हैं कि industry में appearance के आधार पर judge किया जाता है। Director को भी शुरुआत में doubt था कि वह सब्जी वाली जैसा किरदार निभा पाएंगी या नहीं। खुद उन्हें भी भरोसा नहीं था, लेकिन उन्होंने 10 दिन मांगे और असली सब्जीवालियों के साथ रहकर उनकी body language, tone और lifestyle सीखा। मेल लीड एक्टर बताते हैं कि इस फिल्म के लिए उन्हें खुद गटर और नाली में उतरना पडा। असली sanitation workers के साथ काम करते हुए उन्होंने जाना कि यह काम कितना inhuman और emotionally draining है। shoot खत्म होने पर एक worker का emotional होकर उनसे लिपटना यह एहसास दिलाता है कि actors के लिए यह role है, लेकिन उनके लिए यही life है। एक्ट्रेस बताती हैं कि वह एक जाने माने politician की बेटी हैं, लेकिन उनके पिता ने कभी उनके लिए phone नहीं किया। शुरुआत में यह बात उन्हें गलत लगी, लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि यही struggle उन्हें एक better actor बनाता है। इस फिल्म को उनके पिता ने पहली बार support किया क्योंकि यह socially relevant थी, political नहीं। फिल्म की screening के बाद कई बड़े leaders और artists emotionally move हुए। कुछ नेताओं ने sanitation workers की safety और rights पर parliament में सवाल भी उठाए। यही फिल्म की real success बनती है। दोनों कलाकार कहते हैं कि हर फिल्म पैसे कमाने के लिए नहीं बनती। cinema unpredictable है। अगर content honest और powerful है, तो word of mouth ही सबसे बड़ा promotion बन जाता है। यह फिल्म भी उसी belief से बनी है। आखिर में टीम audience से यही कहती है कि अगर trailer, music और story आपको touch करती है, तो theatre में जाकर फिल्म देखें। यह सिर्फ love story नहीं, बल्कि courage, dignity और humanity की कहानी है




























