सोलह पीढ़ियों के तृप्त होने की कामना के साथ संगम पर उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम
प्रयाग में संगम तट पर केशदान यानी मुंडन संस्कार से ही पिंडदान की रस्मे शुरू होती हैं. यही वजह है कि पितृ पक्ष की अमावस्या पर आज इलाहाबाद के संगम के सभी घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा है और लोग पिंडों का विसर्जन कर अपने पुरखों के लिए मोक्ष की कामना कर रहे हैं. इस मौके पर संगम समेत सभी घाटों पर सुरक्षा के ख़ास इंतजाम किये गए हैं.
पितृ पक्ष का संगम नगरी इलाहाबाद में विशेष महत्व है. सृष्टि के रचयिता परम पिता ब्रह्मा का मुखस्थल और त्रिवेणी संगम की धारा में मोक्ष के देवता भगवान विष्णु के साक्षात वास करने के कारण इलाहाबाद को पितृ मुक्ति का प्रथम व मुख्य द्वार कहा गया है.
इस बार की अमावस्या के सोमवार के दिन पड़ने से इसका महत्व काफी ज़्यादा हो गया है. सोमवार होने की वजह से आज का दिन सोमवती पितृ अमावस्या हो गया है. इस तरह का ख़ास संयोग कई साल बाद देखने को मिला है.
पूर्वजों की आत्मा की शान्ति व मुक्ति के लिए पिछले एक पखवारे से चल रहे पितृ पक्ष का आज अमावस्या पर समापन हो रहा है. ग्रहों और नक्षत्रों के ख़ास संयोग के चलते इस बार के पितृ पक्ष की अमावस्या का महत्व कई गुना ज़्यादा बढ़ गया है. पितृ पक्ष के अंतिम दिन अमावस्या पर आज देश के कोने-कोने से आये हजारों श्रद्धालु मुंडन और पिंडदान के बाद संगम स्नान कर अपने पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति-तृप्ति की कामना कर रहे हैं.
मान्यता है कि पितृ पक्ष के अंतिम दिन यानी अमावस्या पर इलाहाबाद के संगम में श्राद्ध कर्म कर पिंडदान और तर्पण करने वालों की सोलह पीढ़ियां तृप्त हो जाती हैं. अमावस्या पर इलाहाबाद में किया गया श्राद्ध पितृ ऋण से भी मुक्ति दिलाता है.