सरकारी गोदामों में गेंहू भीगने पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और यूपी सरकार से जवाब तलब

अदालत ने इसे बेहद गंभीर मामला माना है और कहा है कि अनाज को किसी भी सूरत में बर्बाद होने से बचाने की कोशिश होनी चाहिए. अदालत ने सभी को जवाब दाखिल करने और उचित कदम उठाने के लिए दो हफ्ते की मोहलत दी है.
इलाहाबाद: बारिश के सीजन में यूपी के कई हिस्सों में एफसीआई गोदामों और यूपी सरकार के क्रय केंद्रों पर गेंहूं भीगने की खबरों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गहरी नाराज़गी जताते हुए केंद्र और यूपी सरकार से उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
पीआईएल में कहा गया था कि सरकारी अमले की लापरवाही से हर साल लाखों टन अनाज इसी तरह बारिश के पानी में भीगकर सड़ जाता है. इससे गरीबों को कम कीमत पर अनाज मुहैया कराने की योजना पर ज़बरदस्त असर पड़ता है और अरबों रूपये के राजस्व का नुकसान होता है.
यह आदेश जस्टिस अभिनव उपाध्याय और जस्टिस सरल श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच ने लॉ स्टूडेंट अहीश योगी व बारह अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. इन लॉ स्टूडेटंस ने यूपी के अलग अलग हिस्सों से आई मीडिया रिपोर्ट्स और अपनी पड़ताल के आधार पर यह पीआईएल दाखिल की थी.
अदालत ने केंद्र और यूपी सरकार के साथ ही एफसीआई से पूछा है कि मानसून का समय तय होने के बावजूद किसानों से खरीदे गए गेंहू को बारिश के पानी से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किये गए थे. सरकारें अब तात्कालिक तौर पर कौन से कदम उठाने जा रही हैं.
अदालत ने इस बारे में केंद्र और यूपी सरकार के साथ ही एफसीआई और यूपी राज्य भंडारण निगम को नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब कर लिया है. अदालत ने कहा है कि गेंहू व दूसरे अनाज किसी कीमत पर भीगने नहीं चाहिए और अगर यह भीगते हैं तो ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.