हर नौकरीपेशा व्यक्ति के मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर कितनी सैलरी में जिंदगी आराम से चल सकती है? क्या 50 हजार रुपये महीने की कमाई काफी है या फिर इसके लिए लाखों रुपये की सैलरी चाहिए? इस सवाल का जवाब हर इंसान की जरूरत, शहर, परिवार और लाइफस्टाइल पर डिपेंड करता है. आज के समय में सिर्फ ज्यादा कमाना ही जरूरी नहीं है, बल्कि सही तरीके से खर्च और बचत करना भी उतना ही जरूरी है.

Continues below advertisement

छोटे शहरों में कितनी सैलरी चाहिए?अगर कोई व्यक्ति छोटे शहर या कस्बे में रहता है और उसके ऊपर बड़ी जिम्मेदारियां नहीं हैं, तो 40-50 हजार रुपये महीने की सैलरी में भी आरामदायक जिंदगी जी सकता है. किराया, खाने-पीने और रोजमर्रा के खर्च बड़े शहरों की तुलना में कम होते हैं, जिससे बचत के लिए भी पैसा बच जाता है. वहीं, अगर परिवार बड़ा है, बच्चों की पढ़ाई, होम लोन या दूसरी जिम्मेदारियां हैं, तो ज्यादा आय की जरूरत पड़ती है.

क्या चलती ट्रेन की चेन कभी भी खींच सकते हैं यात्री? जानें रेलवे के नियम

Continues below advertisement

मेट्रो शहरों में कितनी सैलरी चाहिए?दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में रहने का खर्च काफी ज्यादा है. यहां घर का किराया, ट्रांसपोर्ट, बाहर खाना और अन्य सुविधाओं पर ज्यादा पैसा खर्च होता है. ऐसे शहरों में एक अकेले व्यक्ति के लिए 70 हजार से 1 लाख रुपये प्रति माह की आय एक आरामदायक जीवन के लिए बेहतर मानी जा सकती है. वहीं परिवार के साथ रहने पर ये जरूरत और बढ़ सकती है.

आरामदायक जिंदगी का मतलब क्या है?आरामदायक जीवन का मतलब सिर्फ महंगी चीजें खरीदना नहीं है. इसका मतलब ये भी होता है कि घर का खर्च आसानी से निकल जाए, हर महीने कुछ बचत हो, इमरजेंसी के लिए पैसा जमा हो, स्वास्थ्य और बीमा का ध्यान रखा जा सके, कभी-कभी घूमने या मनोरंजन पर खर्च किया जा सके और भविष्य के लिए निवेश किया जा सके. 

रक्षा बंधन से पहले पोस्ट ऑफिस ने बढ़ाए रेट, स्पीड पोस्ट के बदले नियम

50-30-20 नियम से समझें बजट-

  • 50%- जरूरी खर्चों के लिए
  • 30%-  इच्छाओं और लाइफस्टाइल के लिए
  • 20%- बचत और निवेश के लिए 

जैसै मान लिजिए अगर किसी व्यक्ति की सैलरी 1 लाख रुपये महीने है, तो कोशिश होनी चाहिए कि करीब 20 हजार रुपये आगे के लिए निवेश किए जाएं.