चेक बाउंस के मामले में हाल ही में अभिनेता राजपाल यादव को जेल जाना पड़ा. दरअसल राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में लगभग 9 करोड़ रुपये का बकाया शामिल है. उनका यह मामला 2010 का है जब अभिनेता ने अपनी फिल्म के लिए करीब 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था. वहीं फिल्म फ्लॉप होने के कारण कर्ज नहीं चुकाया जा सका. इसके बाद ब्याज, जुर्माने और देरी के कारण लोन की राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ हो गई. इसके अलावा लोन चुकाने के लिए दिए गए चेक भी बाउंस हो गए, जिसके बाद राजपाल यादव ने सरेंडर कर दिया.

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आमतौर पर कई लोग चेक बाउंस को छोटी-मोटी एडमिनिस्ट्रेटिव दिक्कतें मानते हैं. लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा अलग है. दरअसल अभिनेता राजपाल यादव के मामले ने साफ कर दिया है कि चेक बाउंस को छोटी प्रशासनिक गलती समझना भारी पड़ सकता है. भारतीय कानून में चेक बाउंस को गंभीर आर्थिक अपराध माना गया है. नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत अगर चेक पर्याप्त बैलेंस न हो होने की वजह से बाउंस होता है और तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है तो यह आपराधिक मामला बन सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि चेक बाउंस को लेकर क्या कानून है और चेक बाउंस होने पर कितनी सजा मिलती है. 

क्या है सेक्शन 138?

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धारा 138 के अनुसार अगर बैंक किसी चेक को पर्याप्त धनराशि या अन्य वैध कारण से डिशऑनर कर देता है तो चेक जारी करने वाले के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है. वहीं दोष साबित होने पर 2 साल तक की जेल, चेक राशि का दोगुना जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है. यह प्रावधान तब लागू होता है, जब चेक बाउंस होने के बाद कानूनी नोटिस भेजा जाए और नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर भुगतान न किया जाए. 

क्या है कानूनी प्रक्रिया?

चेक बाउंस होने पर बैंक रिटर्न मेमो जारी करता है. इसके बाद प्राप्तकर्ता को 30 दिनों के अंदर कानूनी नोटिस भेजना होता है. नोटिस मिलने के बाद चेक जारी करने वाले को 15 दिन का समय दिया जाता है, अगर इस अवधि में भुगतान नहीं होता है तो अगले 30 दिनों के अंदर मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दर्ज की जा सकती है. वही कानून के अनुसार ऐसे मामलों का निपटारा 6 महीना में होना चाहिए. इसके अलावा चेक बाउंस होने पर अदालत की सजा से पहले भी बैंक की ओर से जुर्माना लगाया जाता है. आमतौर पर चेक या एनएसीएच मैंडेट फेल होने पर बैंक 100 से 750 रुपये तक का डिशऑनर चार्ज ले सकता है. अगर चेक ईएमआई, किराया या क्रेडिट कार्ड भुगतान से जुड़ा है, तो लेट फीस, बाउंस फीस और ब्याज भी जोड़ा जा सकता है. 

किन कारणों से बाउंस होता है चेक?

आमतौर पर चेक खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने, 3 महीने की वैधता अवधि समाप्त होने, सिग्नेचर मेल न खाने, ओवरराइटिंग, डिटेल में गड़बड़ी या चेक का खराब होना के कारण बाउंस हो सकता है. वहीं सबसे आम और दंडनीय कारण खाते में पर्याप्त रकम न होना है. वहीं कानूनी नोटिस में वही राशि लिखी जानी चाहिए जो चेक पर दर्ज है. राशि में मामूली अंतर भी नोटिस को अमान्य कर सकता है और साथ ही चेक किसी कानूनी देनदारी या ऋण के भुगतान के लिए जारी होना चाहिए.

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