क्या है पश्चिम बंगाल की कृषक बंधु योजना, इसमें किसानों को कितना मिलता है पैसा?
Krishak Bandhu Yojana: पश्चिम बंगाल सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है. जिनमें कृषक बंधु योजना भी शामिल है. जानिए कैसे मिलता है इस योजना में लाभ.

Krishak Bandhu Yojana: केंद्र सरकार की तरह देश के अलग-अलग राज्यों की सरकारें भी अपने नागरिकों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती हैं. खासकर किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के लिए राज्य सरकारें अलग-अलग आर्थिक सहायता योजनाएं लागू करती रहती हैं. जिससे खेती से जुड़ी चुनौतियों के बीच उन्हें कुछ राहत मिल सके. इसी तरह पश्चिम बंगाल सरकार ने किसानों के लिए कृषक बंधु योजना शुरू की है.
इस योजना का मकसद खेती से जुड़े लोगों को आर्थिक सहयोग देना है. जिससे वह खेती के खर्च को संभाल सकें. समय के साथ इस योजना में कई बदलाव भी किए गए हैं. हाल ही में राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए इसका दायरा और बढ़ा दिया है. अब बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि इस योजना के तहत किसे फायदा मिलता है और इसमें कितनी आर्थिक मदद दी जाती है.
भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी मिलेगा योजना का फायदा
अब तक इस योजना का लाभ जमीन वाले किसानों को मिलता था. लेकिन नई व्यवस्था के बाद इसमें एक बड़ा बदलाव किया गया है. अब पश्चिम बंगाल के भूमिहीन कृषि मजदूर भी इस योजना के दायरे में शामिल किए जाएंगे. ऐसे लोग जो खेती की जमीन के मालिक नहीं हैं.
और पहले इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे थे. उन्हें भी अब आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरकार के फैसले के अनुसार इन लाभार्थियों को साल में दो किस्तों में पैसा दिया जाएगा. एक किस्त रबी सीजन में और दूसरी खरीफ सीजन में जारी की जाएगी.
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कितने मिलेंगे पैसे?
अब कई लोगों के मन में यह सवाल भी आ रहा है कि पश्चिम बंगाल की कृषक बंधु योजना में किसानों को कितने रुपये दिए जाएंगे. तो आपको बता दें कि योजना में पहली किस्त में 2000 रुपये दिए जाएंगे. तो वहीं दूसरी किस्त में भी 2000 रुपये दिए जाएंगे. यानी कुल मिलाकर सालभर में 4000 रुपये दिए जाएंगे. यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाएगी. जिससे प्रोसेस आसान बनी रहे.
ऐसे कर सकते हैं योजना के लिए आवेदन
कृषक बंधु योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया ऑफलाइन रखी गई है. इसके लिए राज्य सरकार समय-समय पर अलग-अलग जगहों पर सरकारी कैंप आयोजित करती है. इन कैंपों को आम तौर पर दुआरे सरकार या आत्मनिर्भर बंगाली कैंप के नाम से आयोजित किया जाता है. इच्छुक लाभार्थी इन कैंपों में जाकर आवेदन जमा कर सकते हैं.
यहां कृषि विभाग के अधिकारी आवेदन से जुड़े दस्तावेजों की जांच करते हैं. आम तौर पर असिस्टेंट एग्रीकल्चर ऑफिसर दस्तावेजों को देखकर आवेदन को वेरिफाई करते हैं. जांच पूरी होने के बाद पात्र लोगों के नाम योजना की सूची में जोड़ दिए जाते हैं. इसके बाद सरकार की तरफ से तय समय पर DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में पैसा भेज दिया जाता है.
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किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं. आवेदन के समय पहचान और बैंक से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाती है. आम तौर पर आवेदक से आधार कार्ड और वोटर कार्ड मांगा जाता है. इसके अलावा बैंक पासबुक के पहले पेज की फोटोकॉपी भी देनी होती है. जिससे बैंक खाते की जानकारी सही तरीके से दर्ज की जा सके.
आवेदन के साथ आधार और बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर देना भी जरूरी होता है. इसके अलावा पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो और आवेदक के साइन भी लिए जाते हैं. भूमिहीन कृषि मजदूरों के मामले में एक स्वघोषणा पत्र भी देना पड़ता है. जिसमें वह खुद को कृषि मजदूर होने की जानकारी देता है.
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