Aadhaar App Launch 2026: आधार भारत में इस्तेमाल होने वाले सबसे कॉमन दस्तावेजों में से एक है. बैंक अकाउंट खोलना हो, सिम लेना हो, होटल चेक इन करना हो या किसी सरकारी स्कीम का फायदा उठाना हो. हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है. ऐसे में ऑनलाइन फ्रॉड, फेक वेबसाइट और ओटीपी स्कैम के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल सेफ्टी काफी जरूरी हो गई है. इसी को ध्यान में रखते हुए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने नया आधार मोबाइल ऐप लॉन्च किया है. जान लीजिए कैसे काम करता है यह ऐप और क्या हैं इसके फायदे.
नया आधार ऐप कैसे करता है काम?
यह नेक्स्ट जनरेशन ऐप प्राइवेसी फर्स्ट और कंसेंट बेस्ड मॉडल पर तैयार किया गया है. इसमें आपकी जानकारी पर आपका कंट्रोल रहेगा. लॉग इन करने के लिए आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए ओटीपी का इस्तेमाल किया जाएगा. ऐप फेस ऑथेंटिकेशन, फिंगरप्रिंट और सिक्योर पिन सपोर्ट करता है. एक बार लॉग इन करने के बाद यूजर बिना बार बार डिटेल डाले अपनी प्रोफाइल देख सकता है.
नाम, फोटो और एड्रेस जैसी जानकारी डिवाइस पर सेफली स्टोर रहती है. पहचान सत्यापन के लिए डिजिटल साइन की गई डिटेल शेयर होती है. आधार नंबर स्टोर नहीं किया जाता. यह पूरा सिस्टम डेटा मिनिमाइजेशन के प्रिंसिपल पर बेस्ड है. यानी जरूरत जितनी हो उतनी ही जानकारी शेयर होगी.
क्या होंगे इसके फायदे?
नया ऐप आप आसानी से यूज कर सकते हैं. इसमें कई फायदे हैं. जिसमें होटल चेक इन के लिए क्यूआर कोड आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन, सिनेमा टिकट के लिए एज वेरिफिकेशन और अस्पताल विजिटर चेक जैसे फीचर शामिल हैं. गिग वर्कर्स और सर्विस पार्टनर्स की पहचान भी इसी से हो सकती है.
कॉन्टैक्ट डिटेल शेयर करने के लिए क्यूआर बेस्ड कॉन्टैक्ट कार्ड दिया गया है. एक ही मोबाइल में पांच आधार प्रोफाइल मैनेज करने की सुविधा भी है. जिससे वन फैमिली वन ऐप का कॉन्सेप्ट मजबूत होता है. एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर यह ऐप काम करता है.
सेफ्टी पर है खास ध्यान
ऐप की सबसे अहम खासियत बायोमेट्रिक लॉक और अनलॉक फीचर है. अगर किसी यूजर को डेटा मिसयूज का शक हो. तो वह तुरंत अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस डेटा को लॉक कर सकता है. बिना परमिशन कोई भी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन नहीं कर पाएगा. यूजर्स अपनी ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री भी देख सकते हैं.
जिससे यह पता चलता है कि कब और कहां आधार का इस्तेमाल हुआ. सेलेक्टिव क्रेडेंशियल शेयरिंग फीचर के जरिए सिर्फ वही जानकारी शेयर होती है. जिसकी जरूरत हो. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक यह सिस्टम डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत डिजाइन किया गया है.
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