Indian Railway: भारतीय रेलवे अपने अपने सभी यात्रियों और उनकी सुविधाओं का बहुत अच्छी तरह से ध्यान रखता है. रेलवे में अब सबकुछ ऑनलाइन हो गया है. जैसे पहले लंबी लाइनों में लगकर टिकट लेना होते थे, वेटिंग टिकट को कंफर्म करवाने के लिए भी लंबी लाइन लगती थी, लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं है. हालांकि वेटिंग टिकट तो अब भी लोगों के होते हैं लेकिन ये प्रक्रिया अब थोड़ी सरल हो गई है और पहले ही पता चल जाता है कि टिकट कंफर्म है या नहीं या कंफर्म हो भी पाएगा या नहीं.
इसी बीच क्या आप जानते हैं कि रेलवे में वेटिंग टिकट के भी कई प्रकार होते हैं? नहीं जानते, तो आइये बताते हैं कि भारतीय रेलवे में टिकट के तीन अलग- अलग प्रकार होते हैं, GNWL, PQWL और TQWL. ये टिकट कंफर्म होने की संभावना और बुकिंग के तरीके को बताते हैं. आइये बताते हैं तीनों में क्या फर्क है और तीनों में से कौन सा टिकट पहले कंफर्म होता है.
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GNWL (जनरल वेटिंग लिस्ट)भारतीय रेलवे में ये सबसे सामान्य वेटिंग लिस्ट होती है. जब यात्री ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से लेकर अपनी डेस्टिनेशन तक का टिकट बुक करता है, तब GNWL मिलता है. इसमें टिकट कन्फर्म होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है. जैसे-जैसे लोग टिकट कैंसिल करते हैं, GNWL जल्दी आगे बढ़ती है.
PQWL (पूल्ड कोटा वेटिंग लिस्ट)ये उन यात्रियों के लिए होती है जो ट्रेन के बीच के स्टेशनों में यात्रा करते हैं. इसमें कई छोटे स्टेशनों का एक शेयर कोटा होता है. कन्फर्म होने की संभावना GNWL से कम होती है. टिकट तभी कंफर्म होता है जब उसी पूल वाले रूट का कोई यात्री टिकट कैंसिल करे.
TQWL (तत्काल वेटिं लिस्ट)यह तत्काल कोटे की वेटिंग लिस्ट होती है. तत्काल टिकट फुल होने पर TQWL मिलता है. इसकी कंफर्मेशन संभावना सबसे कम मानी जाती है. चार्ट बनने तक कंफर्म न होने पर ई-टिकट अपने आप कैंसिल हो जाता है और रिफंड मिल जाता है.
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तीनों में से किसमें होगा जल्दी टिकट बुक?सबसे पहले GNWL में टिकट बुक होता है, इसके बाद PQWL में टिकट बुक होता है और सबसे कम संभावना TQWL होती है. ऐसे में आप अपने टिकट में देखकर पतालगा सकते हैं कि आपकी टिकट कैसे और कब कंफर्म हो सकती है.
