Vande Bharat Train Masterplan: रेलवे का नया फ्यूचर प्लान भारतीय रेलवे वंदे भारत ट्रेनों को अपने फ्यूचर के बड़े प्लान का हिस्सा बना रहा है. वंदे भारत अब सिर्फ नई और बेहतर रेलवे की पहचान नहीं रह गई है, बल्कि रेलवे के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया भी बन रही है. रेलवे की योजना 2030 तक 800 से ज्यादा वंदे भारत ट्रेनसेट चलाने की है.

Continues below advertisement

वंदे भारत ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या लगातार ज्यादा हो रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 3.98 करोड़ यात्रियों ने वंदे भारत से सफर किया. ये संख्या 2024-25 में 2.97 करोड़ थी. यानी एक साल में यात्रियों की संख्या करीब 34% ज्यादा हुई है. साल 2019 में नई दिल्ली वाराणसी के बीच पहली वंदे भारत शुरू हुई थी. तब से अब तक इन ट्रेनों में 9.1 करोड़ से ज्यादा यात्री सफर कर चुके हैं.

कई रूट पर सीटें फुल

Continues below advertisement

वंदे भारत की कई ट्रेनों में सीटों की मांग काफी ज्यादा है. तिरुवनंतपुरम, मंगलुरु, नई दिल्ली, वाराणसी और सिकंदराबाद, विशाखापत्तनम जैसे रूट पर यात्रियों की संख्या काफी ज्यादा रही है. कुछ रूट पर ऑक्यूपेंसी 100% से भी ज्यादा दर्ज की गई. ऐसा बीच के स्टेशनों से होने वाली बुकिंग के वजह से होता है.

यह भी पढ़ें- Personal Finance: हर मिडिल क्लास को छोड़ देनी चाहिए ये 5 आदतें, वरना रह जाएंगे गरीब

वंदे भारत से रेलवे की कमाई में भी इजाफा हुआ है. दक्षिण रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, उस इलाके की वंदे भारत ट्रेनों से यात्री कमाई वित्त वर्ष 2024-25 में 540.65 करोड़ रुपये थी. ये  वित्त वर्ष 2025-26 में ज्यादा होकर 803 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई.

स्लीपर वंदे भारत की शुरुआत

अब वंदे भारत का इस्तेमाल सिर्फ दिन में सफर के लिए नहीं होगा. वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के जरिए रात के सफर में भी प्रीमियम सर्विस देने की तैयारी है. शुरुआती स्लीपर सर्विस में 1.21 लाख से ज्यादा यात्रियों ने सफर किया और ट्रेनें पूरी क्षमता के साथ चलीं.

रेलवे का मकसद 2030 तक 800 से ज्यादा वंदे भारत ट्रेन सेट तैयार करना है. इससे देश में तेज और आरामदायक रेल सफर का नेटवर्क ज्यादा होगा. रेलवे को उम्मीद है कि इससे ज्यादा किराया देने वाले यात्री एयरलाइन और रोड से सफर की जगह ट्रेन से सफर करना पसंद कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें-3000 रुपए में किराए पर दिए बैंक खाते, हुआ 25 करोड़ का फ्रॉड