Delivery Charges: आज के डिजिटल दौर में जोमैटो स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स हमारी जीवनशैली का बेहद ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन, क्या आप यह जानते हैं कि इन ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स से घर बैठे ग्राहकों को कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है. इसकी मुख्य वजह और कुछ नहीं है बल्कि बिल में जुड़कर आने वाले छिपे हुए शुल्क हैं.
आखिर क्या है फ्री डिलीवरी के पीछे की सच्चाई?
ज्यादातर ये ऐप्स ग्राहकों को लुभाने के लिए 'मुफ़्त डिलीवरी' या फिर भारी भरकम डिस्काउंट का विज्ञापन उनके मोबाइल फोन में देना शुरू कर देते हैं. लेकिन जब अंतिम बिल सामने आता है, तो उसकी कीमत असल में कहीं ज्यादा होती है. लेकिन, अब इन कंपनियों ने डिलीवरी फीस के अलावा कई नए चार्ज जोड़ने भी शुरू कर दिए हैं.
1. प्लेटफॉर्म फीस
यह एक ऐसा शुल्क है जो हर ऑर्डर पर लिया जाता है, चाहे आप उनके प्रीमियम मेंबर ही क्यों न हों. तो वहीं, हाल के दिनों में इसे 2 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये तक कर दिया गया है.
2. हैंडलिंग और पैकेजिंग चार्ज
इसके अलावा हैंडलिंग और पैकेजिंग चार्ज भी ग्राहकों से लिए जाते हैं. जहां, सामान को पैक करने के नाम पर अलग से 15 से 30 रुपये तक बेहद ही आसानी से वसूल लिए जाते हैं.
3. हाई डिमांड/रेन सर्ज
मौसम खराब होने या फिर त्योहारों के दौरान मांग बढ़ते ही डिलीवरी चार्ज को अचानक दोगुना कर दिया जाता है. ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों से मुनाफा कमाया जा सके.
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रेस्टोरेंट और ऐप की कीमतों में क्या होता है अंतर?
एक बड़ा छिपा हुआ खेल 'इन्फ्लेटेड प्राइसिंग' का भी यहां देखने को मिलता है. कुछ ग्राहकों के अनुभवों से यह साफ हुआ है कि जो खाना रेस्टोरेंट के मेन्यू में 200 का होता है, वहीं इन ऐप्स पर 300 से ज्यादा का दिखाया जाता है. ऊपर से जीएसटी और डिलीवरी पार्टनर टिप जुड़ने के बाद अंतिम बिल जेब पर बहुत भारी पड़ता है.
हांलाकि, सुविधा के नाम पर शुरू हुआ यह सिलसिला अब आम उपभोक्ताओं की जेब पर धीरे-धीरे असर डालने की कोशिश कर रहा है. जिसको लेकर जागरूक ग्राहकों की मांग है कि इन शुल्कों में पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि उन्हें पता रहे कि वे किस बात का और कितना ज्यादा पैसा दे रहे हैं.
