कोर्ट जाने की नहीं होगी जरूरत, एक फोन कॉल पर मिलेगी कानूनी मदद, जानें तरीका
Tele-Law Service: कानूनी उलझन में फंसे हैं और वकील तक पहुंचना मुश्किल लग रहा है. अब घर बैठे सिर्फ एक कॉल पर मिल सकती है सही लीगल गाइडेंस. जानिए कैसे आसान हुआ मदद पाने का तरीका.

Tele-Law Service: जिंदगी में कई बार लोग ऐसी स्थिति में फंस जाते हैं जहां उन्हें कानूनी सलाह की जरूरत होती है. लेकिन हर किसी के पास वकील की भारी फीस देने लायक पैसा नहीं होता. कई लोग सिर्फ जानकारी की कमी में डर जाते हैं या गलत फैसला ले बैठते हैं. हर विवाद कोर्ट तक जाए यह जरूरी नहीं. इसलिए सही समय पर सही सलाह मिल जाए तो आधी परेशानी वहीं खत्म हो सकती है.
अब इसी मकसद से सरकार ने एक ऐसी सुविधा शुरू की है जहां घर बैठे कानूनी सलाह ली जा सकती है. न लंबी लाइन, न बार-बार ऑफिस के चक्कर. बस एक कॉल या वीडियो कनेक्शन और आप सीधे वकील से बात कर सकते हैं. इस पहल का मकसद कानूनी मदद को आम लोगों तक पहुंचाना. खासकर उन तक जो दूर-दराज इलाकों में रहते हैं या आर्थिक रूप से कमजोर हैं. जानें कैसे मिलती है मदद.
टेली-लॉ सर्विस क्या है?
भारत सरकार के न्याय विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की डिजिटल पहल है. जिसकी शुरुआत 2017 में हुई थी. मकसद है मुकदमा दायर करने से पहले सही कानूनी सलाह देना. जिससे छोटे विवाद बड़े केस में न बदलें. इसे कानून मंत्रालय और मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने मिलकर लागू किया.
खास तौर पर ग्रामीण और कमजोर वर्गों को ध्यान में रखकर इसे डिजाइन किया गया है. यानी जिन्हें वकील तक पहुंचने में दिक्कत होती है. वह भी अब प्रोफेशनल गाइडेंस ले सकते हैं. पूरा सिस्टम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काम करता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है.
कैसे मिलती है कानूनी सलाह?
इस सर्विस के तहत लोगों को पैनल में शामिल वकीलों से फोन या वीडियो कॉल के जरिए जोड़ा जाता है. देशभर में मौजूद काॅमन सर्विस सेंटर्स यानी CSC सेंटर इसमें अहम रोल निभाते हैं. गांव या पंचायत स्तर पर मौजूद यह सेंटर लोगों को कनेक्ट करने में मदद करते हैं.
इसके अलावा मोबाइल यूजर्स के लिए Tele-Law Mobile App भी मौजूद है. जहां से सीधे आवेदन किया जा सकता है. तय समय स्लॉट में करीब 20 मिनट तक वकील आपकी समस्या सुनते हैं और कानून के मुताबिक सही दिशा बताते हैं. इससे बिना कोर्ट गए शुरुआती स्तर पर ही समाधान तलाशा जा सकता है.
किन मामलों में मिल सकती है मदद?
सरकार की ओर से इस सुविधा कई मामलों में मिलती है. इनमें आपको पारिवारिक विवाद, तलाक, घरेलू हिंसा, भरण-पोषण, जमीन-जायदाद के झगड़े, मजदूरी से जुड़े मुद्दे, एफआईआर की प्रक्रिया या एससी-एसटी अत्याचार जैसे मामलों में यह सेवा मार्गदर्शन देती है. पहले कुछ मामलों में मामूली फीस ली जाती था. लेकिन अब यह सुविधा सभी नागरिकों के लिए पूरी तरह फ्री है. अब कानूनी सलाह के लिए आपको कोर्ट के चक्कर नहीं काटने होंगे.
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