SIP Mistake: लोगों के बीच बढ़ती जानकारी और आसान होती टेक्नोलॉजी की पहुंच से आज निवेशक अलग-अलग निवेश विकल्पों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) निवेश उनमें से एक है. अगर आप भी एसआईपी में निवेश करते हैं तो आपको एक ऐसी गलती से बचना चाहिए, जो आपको तगड़ा नुकसान पहुंचा सकती है.

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एसआईपी के तहत कई तरह के चार्ज लिए जाते हैं, जिनकी जानकारी आपको होनी चाहिए. इनमें से एक हैं एसआईपी किस्त फेल होने पर लगने वाला चार्ज. आइए जानते हैं, यह छोटी सी गलती कैसे आपके वेल्थ को प्रभावित कर सकती है?

SIP किस्त फेल होने का असर

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अगर एसआईपी की किस्त समय पर बैंक से कट नहीं पाती है, तो निवेशकों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता हैं. खासकर NACH (नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस) के जरिए चलने वाली SIP में अगर अकाउंट में बैलेंस कम हो और ऑटो डेबिट फेल हो जाए, तो बैंक की तरफ से जुर्माना वसूला जाता हैं.

बैंक आमतौर पर हर फेल ट्रांजैक्शन पर 250 से 750 रुपये तक का जुर्माना वसूलती है. साथ ही इस पर 18 प्रतिशत GST भी जोड़ा जाता है. बार-बार ऐसा होने पर निवेशकों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है और लंबी अवधि में रिटर्न पर भी असर पड़ता है.

इन छोटी गलतियों से बचें

कई लोग इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि SIP में लगने वाले चार्ज प्रति लेनदेन के हिसाब से लगते हैं, न कि एक बार में. ऐसे में अगर एक ही तारीख पर कई SIP की किस्त फेल हो जाए, तो हर ट्रांजैक्शन पर अलग-अलग पेनल्टी लगती है. जिससे आप पर लगने वाला चार्ज बहुत ज्यादा हो जाता है. साथ ही बार-बार ऐसा होने पर आगे चलकर SIP की प्रोसेस में दिक्कत आ सकती है. 

ऐसे काम करता है सिस्टम

भारत में SIP की प्रक्रिया आमतौर पर नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के NACH सिस्टम से चलाई जाती है. इसके तहत एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को पहले से तय तारीखों पर निवेशक के बैंक खाते से सीधे एसआईपी की किस्त डेबित करने की अनुमति दी जाती है. अगर बैंक में पर्याप्त पैसा न हो तो बैंक इसपर जुर्माना वसूलता है. इसलिए निवेशकों को सलाह दी जाती हैं कि, वे तय समय से पहले ही अपने बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसे रखें.

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