भारत सरकार गावों में बेहतर सुविधाएं पहुंचाने की तमाम कोशिशें कर रही हैं. इसी कड़ी में सरकार ने प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की भी शुरुआत की है. इस योजना के तहत सरकार गांवों के लोगों को एलपीजी गैस की सब्सिडी दे रही है. जिससे लोग वहां पर भी गैस का इस्तेमाल कर सकें और केवल चूल्हे पर निर्भर ना रहें. लेकिन फिर भी यहां करीब 23 प्रतिशत लोग ही केवल एलपीजी का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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CEEW की रिपोर्ट में खुलासादरअसल हाल ही में काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर की एक रिपोर्ट सामने आई है, इस रिपोर्ट में बताया गया है कि, ग्रामीण भारत में LPG की पहुंच बढ़ी है, लेकिन इसका नियमित और पूरी तरह इस्तेमाल अभी भी लोग सीमित ही कर रहे हैं. सर्वे में 6 राज्यों के 2200 ग्रामीण परिवार, 1100 शहरी अनौपचारिक बस्तियों के परिवार और 10 शहरों में एक हजार से ज्यादा प्रवासी कामगारों को शामिल किया गया.

करीब 73% ग्रामीण परिवारों ने पिछले 90 दिनों में LPG का इस्तेमाल किया, लेकिन सिर्फ 23% परिवार LPG पर पूरी तरह निर्भर हैं. करीब 50% ग्रामीण परिवार अभी भी खाना पकाने के लिए मुख्य रूप से चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें लकड़ी लगाकर खाना पकाया जाता है. इस सर्वे में प्रवासी मजदूरों की स्थिति सबसे खराब पाई गई.

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PMUY की पहुंच है कमइस सर्वे रिपोर्ट में ये भी खुलासा हुआ है कि PMUY यानी प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की पहुंच प्रवासी मजदूरों तक बहुत कम है. सिर्फ 4% से कम प्रवासी मजदूर PMUY में शामिल थे, जबकि 2021 में योजना का विस्तार प्रवासी परिवारों तक किया गया था. सर्वे में पाया गया कि LPG इस्तेमाल करने वाले 79% प्रवासी मजदूरों के पास औपचारिक LPG कनेक्शन नहीं था.

कीमत भी है बड़ी वजहLPG की कीमतें ज्यादा हैं, जिस वजह से इसका इस्तेमाल बड़ी बाधा बन रहा है. सर्वे के मुताबिक, अगर 14.2 किलो LPG सिलेंडर की कीमत 400 रुपये हो जाए, तो कम से कम 80% परिवार LPG का इस्तेमाल करने के लिए तैयार होंगे. सर्वे में ये भी सामने आया कि ग्रामीण परिवार, शहरी अनौपचारिक बस्तियां और प्रवासी मजदूर में 500 रुपये तक की कीमत को स्वीकार कर सकते हैं. जबकि जबकि PMUY कीमत करीब 642 रुपये बताई गई है.

घर तक डिलीवरी है बड़ी समस्याइस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सिर्फ 47% ग्रामीण LPG उपयोगकर्ताओं को घर तक सिलेंडर की डिलीवरी मिलती है. इससे रिफिल की लागत और सिलेंडर लाने-ले जाने की समस्या बढ़ती है. जिसके कारण लोग यहां पर गैस सिलेंडर को इस्तेमाल करने से बचते नजर आते हैं. इसके अलावा जिन लोगों के पास औपचारिक कनेक्शन नहीं था, उनमें 31% लोगों को दस्तावेजों की कमी के कारण कनेक्शन नहीं मिला.

कुछ लोग मजबूरी में अनौपचारिक बाजार से LPG सिलेंडर खरीद रहे हैं. ऐसे मामलों में सिलेंडर की कीमत करीब 1040 रुपये तक पहुंची, जबकि उस समय आधिकारिक खुदरा कीमत 803 रुपये थी.

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CEEW का सुझावइस रिपोर्ट के साथ ही CEEW ने अपनी तरफ से सुझाव दिया है, जिससे गांव में भी LPG का इस्तेमाल बढ़ चढ़कर किया जाए. जैसे कि:

  • PMUY सब्सिडी में लगभग 200 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की जाए, ताकि कीमत करीब 400 रुपये के एफॉर्डेबिलिटी लेवल तक लाई जा सके.
  • प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष PMUY एनरोल ड्राइव्स चलाई जाएं. 
  • LPG की लास्ट माइल डिलीवरी व्यवस्था मजबूत की जाए.
  • प्रवासी इलाकों में पे एज यू गो स्मार्ट LPG कियोस्क शुरू करने का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाए, ताकि लोग जरूरत के अनुसार छोटे या आंशिक रिफिल ले सकें.