Train News: भारतीय रेलवे ने पिछले पांच सालों में करीब 1.93 लाख करोड़ रुपये का कर्ज और उस पर ब्याज चुकाया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में ये जानकारी दी.  उन्होंने बताया कि रेलवे ने ये रकम अपने कर्ज देने वाले डिपार्टमेंट और वित्त मंत्रालय को पेमेंट के तौर पर दी है.

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नया कर्ज लेने से दूरी

पिछले कुछ सालों से रेलवे ने बाजार से नया कर्ज लेने से दूरी बनाई हुई है. इसकी बड़ी वजह रेलवे पर ज्यादा कर्ज और कोरोना के बाद देश में सरकार का विकास के कामों पर ज्यादा पैसा खर्च करने का फैसला है. सरकार रेलवे की सर्विस और दूसरी जरूरी चीजों पर ज्यादा पैसा लगा रही है.

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रेल मंत्री के मुताबिक, रेलवे ने पिछले कुछ सालों में अपनी कर्ज चुकाने की हालात को काफी हद तक सही किया है. उन्होंने संसद में लिखित जवाब में बताया कि केंद्र सरकार ने रेलवे को बजट से काफी पैसा दिया है. इस पैसे का इस्तेमाल रेलवे की बुनियादी सर्विस और ट्रेनों से जुड़े जरूरी सामान पर किया गया.

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कर्ज की जरूरत हुई कम

पहले इन कामों के लिए रेलवे को पैसों की जरूरत और कर्ज का सहारा लेना पड़ता था. अब सरकार की ओर से मिलने वाली बजट सहायता का इस्तेमाल इन कामों के लिए किया जा रहा है. इससे रेलवे को बाजार से कर्ज लेने की जरूरत पहले के मुकाबले कम हुई है.

रेलवे ने इस साल 2021-22 से अब तक करीब 93 हजार करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में चुकाए हैं. वहीं, करीब 1 लाख करोड़ रुपये मूल कर्ज चुकाने में गए हैं.इसके अलावा कोरोना महामारी के दौरान रेलवे को वित्त मंत्रालय से 79 हजार करोड़ रुपये का खास कर्ज भी लेना पड़ा था.

कोरोना के दौरान लिया खास कर्ज

रेल मंत्री ने कहा कि कोरोना जैसी बड़ी फाइनेंशियल परेशानी के बावजूद पिछले कुछ सालों में रेलवे के कर्ज चुकाने का खर्च ठीक हुआ है. वहीं, रेलवे की कर्ज लेने वाली IRFC अब रेलवे से जुड़े दूसरे जगह का भी कर्ज देने का काम ज्यादा कर रही है.

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लेकिन, रेलवे के कर्ज चुकाने से ट्रेनों का किराया अपने आप कम होगा, ऐसा सरकार ने नहीं कहा है. इसलिए फिलहाल 1.93 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने का मतलब किराए में कटौती होना नहीं है.