Railway Compensation Rules: नई दिल्ली से बिहार के दरभंगा जाने दरभंगा क्लोन स्पेशल ट्रेन में बुधवार को भीषण आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई. उत्तर मध्य रेलवे अधिकारी के मुताबिक, ट्रेन नंबर 02570 में सराय भुपत रेलवे स्टेशन के पास आग लगी थी. छठ पर्व की वजह से ट्रेन में काफी भीड़ थी, जिससे यात्रियों में दहशत फैल गया.

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वहीं, दूसरी ओर तिरुवनंतपुरम से दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस के एसी कोच में भी रविवार सुबह अचानक आग लग गई, जिससे यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया. ऐसे हादसों के बाद अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या रेलवे यात्रियों को मुआवजा देता है और इसके नियम क्या हैं. आइए जानते हैं क्या है नियम?

किसे मिलता है इंश्योरेंस का फायदा?

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रेलवे का ट्रैवल इंश्योरेंस सिर्फ कन्फर्म, आरएसी और पार्ट कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को ही इंश्योरेंस का मिलता है. इसके लिए टिकट बुकिंग के दौरान यात्री को करीब 35 पैसे अतिरिक्त देने होते हैं.

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इंश्योरेंस लेने के बाद कंपनी की ओर से यात्री को एसएमएस और ईमेल के जरिए जानकारी भेजी जाती है. ये मैसेज आने के बाद यात्री को इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर जाकर नॉमिनी की जानकारी भरनी होती है. अगर नॉमिनी की जानकारी नहीं दी जाती, तो हादसे की स्थिति में मुआवजा उनके लीगल वारिस को दिया जाता है. साथ ही पहले इसके लिए दावा करना होता है. 

हादसे में कितना मिलता है मुआवजा?

रेलवे ट्रैवल इंश्योरेंस के तहत ट्रेन एक्सीडेंट में मौत होने पर 10 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाता है. वहीं पर्मानेंट टोटल डिसेबिलिटी की स्थिति में भी 10 लाख रुपये तक की राशि मिलती है.

अगर किसी यात्री को पर्मानेंट पार्शल डिसेबिलिटी होती है, तो उसे 7.5 लाख रुपये तक का क्लेम मिल सकता है. इसके अलावा घायल यात्रियों के इलाज के लिए 2 लाख रुपये तक का अस्पताल खर्च और ट्रांसपोर्टेशन का 10 हजार रुपये मिलता है.

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