Will Dispute Update: देश में अभी भी वसीयत एक चुनौती की मुख्य वजह बनी हुई, बजाय कानूनी दर्जा मिलने के बाद भी. देश के अलग अलग कोर्ट में दिन प्रति दिन वसीयत को लेकर नए-नए मामले सामने आते रहते है. वसीयत का कानूनी दर्जा है, लेकिन इसकी प्रामाणिकता या पालन के संबंध में वैध संदेह होने पर इसे चुनौती दी जा सकती है.
दरअसल, जो व्यक्ति मर गया है उसकी प्रोपर्टी के बंटवारे को लेकर उनकी इच्छाओं को सही तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए. हालांकि, भारत में वसीयत को आखिरी और रूकावट नहीं माना जा सकता. जिससे यह प्रतीत होता है कि वसीयत धोखाधड़ी से बनाई गई थी या मृतक व्यक्ति की अंतिम इच्छाओं के अनुसार नहीं थी तो इसे अलग- अलग आधारों पर कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. इस तरह के दावे और विवाद किसी मुख्य वसीयत से संबंधित वसीयतनामा प्रक्रियाओं के दौरान उत्पन्न हो सकते हैं.
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वसीयत की वैधता और जालसाजी से जुड़े विवाद
एक चीज़ और यह कि कानून के अनुसार वसीयत नीती कानून के अनुसार सही माना गया तो बिना किसी बाधा के कोर्ट में इस को मान्य माना जाएगा. हालांकि, जमीनी हकीकत पर यह बटवारा में कठिनाई हो सकती है. दूसरी ओर वसीयत में कोई बदलाव ना होना भी अपने आप में चैलेंज है.
गौरतलब है कि, वसीयत में हस्ताक्षरों की जालसाजी की गई हो या वसीयत मनगढ़ंत ढंग से हो तो दस्तावेज़ अमान्य हो जाएगा और इतना ही नहीं जालसाजी या धोखाधड़ी विवादों को जन्म दे सकती है. आवश्यकता है कि गवाहों वाली या हस्ताक्षरों के अभाव वाली सही रूप से अमान्य ना होने वाली वसीयतें कानूनी रूप से अमान्य घोषित करने की वजह बन सकती हैं.
वसीयत के नियम और कानूनी प्रक्रिया
यह जरूरी है कि, वसीयत में वसीयतकर्ता के हस्ताक्षरों का हो. वही दो गवाहों के हस्ताक्षर ही स्वेच्छापूर्वक माने जाएंगे. कागज़ी में भाषा का सही तरीके से इस्तेमाल से बाधा की आशंका कम रहती. कानूनी प्रक्रिया है शामिल वही जांच में वसीयत में हस्ताक्षर का होना चुनौती हो सकती है और वसीयत को चुनौती देने के मामलों में सबूत पेश करने का बोझ भी एक चुनौतीकर्ता पर ही होता है.
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