सड़क एक्सीडेंट में घायलों के लिए बड़ा ऐलान, 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस ट्रीटमेंट की स्कीम शुरू
PM Rahat Scheme: सड़क हादसे में घायल लोगों को अब बड़ी राहत मिलेगी. नई स्कीम के तहत घायल को तय लिमिट तक कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी. जिससे तुरंत इलाज शुरू हो सकेगा.

PM Rahat Scheme: देश में कई सरकारी योजनाएं चलाई जाती हैं जिनका फायदा करोड़ों लोगों तक पहुंचता है. हर साल देश में बहुत से सड़क हादसे होते है. जिनमें बहुत से लोगों की इलाज न मिलने के चलते जान तक चली जाती है. अब सड़क हादसों से जुड़े मामलों में बड़ी पहल की गई है. सरकार ने PM RAHAT यानी PM RAHAT (Road Accident Victim Hospitalisation and Assured Treatment) नाम की नई योजना शुरू की है.
इसका मकसद है एक्सीडेंट के बाद पैसों की वजह से इलाज में देरी न हो. खासकर गोल्डन ऑवर के दौरान जो हादसे के बाद का पहला घंटा होता है और जिसमें समय पर इलाज मिलने से जान बचने की पाॅसिबिलिटी कई गुना बढ़ जाती है. जिससे घायल का इलाज अस्पताल में बिना बिल की चिंता में हो सके.
पीएम राहत स्कीम में मिलेगा कैशलेस इलाज
इस योजना के तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. यह सुविधा हादसे की तारीख से सात दिनों तक लागू रहेगी. फर्क नहीं पड़ता कि दुर्घटना नेशनल हाईवे पर हुई हो. राज्य सड़क पर या शहर के भीतर.
अगर चोट गंभीर नहीं है तो मरीज को 24 घंटे तक स्टेबल करने और जरूरी इलाज की सुविधा दी जाएगी. वहीं जानलेवा चोट की स्थिति में इलाज 48 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है. पूरी प्रोसेस डिजिटल सिस्टम के जरिए रिकॉर्ड और वेरिफाई की जाएगी. जिससे ट्रांसपेरेंसी बनी रहे और फर्जी क्लेम पर रोक लगे.
गोल्डन ऑवर पर फोकस
यह योजना खासतौर पर गोल्डन ऑवर को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है. अक्सर हादसों में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि अस्पताल में एडमिट करने से पहले पैसों या कागजी प्रक्रिया को लेकर देरी हो जाती है. अब प्रायरिटी सीधे इलाज को दी जाएगी. अस्पतालों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि पहले मरीज की जान बचाना जरूरी है. डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए केस दर्ज होगा और इलाज की परमिशन तेजी से प्रोसेस की जाएगी.
112 से जोड़ा गया सिस्टम
योजना को Emergency Response Support System 112 से जोड़ा गया है. अगर कहीं सड़क हादसा होता है तो पीड़ित, राहगीर या कोई भी मददगार व्यक्ति 112 पर कॉल कर सकता है. कॉल के बाद नजदीकी सरकारी या अधिकृत अस्पताल की जानकारी मिलती है और तुरंत एंबुलेंस भेजी जा सकती है. पुलिस, एंबुलेंस और अस्पताल के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया गया है. जिससे घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द इलाज मिले.
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