नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वाले लोगों के लिए UPI भुगतान से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है. पेंशन नियामक PFRDA ने वित्त मंत्रालय से अनुरोध किया है कि NPS में स्वैच्छिक योगदान करने वाले ग्राहकों को UPI के मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से बाहर रखा जाए.
नियामक का कहना है कि यह किसी व्यापारी को किया जाने वाला भुगतान नहीं, बल्कि व्यक्ति की अपनी रिटायरमेंट बचत के लिए धन जमा करने की प्रक्रिया है. UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट से जुड़े नए नियम अब दिवाली के तुरंत बाद लागू होने वाले हैं. प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने का प्रावधान है.
ऐसे में NPS खातों में UPI के माध्यम से बड़ी रकम जमा करने वाले लोगों के लिए यह तय होना जरूरी है कि उनके भुगतान को किस श्रेणी में रखा जाएगा. PFRDA चाहता है कि NPS D-Remit के जरिए किए जाने वाले UPI भुगतान को व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांजैक्शन माना जाए. इस गिनती में आने वाले ट्रांसफर पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू नहीं होता. हालांकि, फिलहाल नियामक की ओर से छूट मांगी गई है; इसे मंजूरी मिलना अभी तय नहीं है.
क्या है MDR और कितनी लग सकती है फीस?
MDR वह शुल्क है, जो निर्धारित नियमों के तहत कुछ मर्चेंट भुगतानों पर लागू होता है. नए ढांचे के अनुसार, पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन में 2 हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत तक शुल्क निर्धारित किया गया है. 75 हजार रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये बताई गई है.
वहीं, कुछ अन्य क्षेत्रों के लिए अलग दरें तय की गई हैं. पूंजी बाजार से जुड़े भुगतानों, जैसे म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज के लिए, 0.02 प्रतिशत की दर का प्रावधान है. हालांकि, NPS में योगदान पर वास्तविक शुल्क लगेगा या नहीं, यह संबंधित ट्रांजैक्शन के वर्गीकरण और अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा.
क्या है NPS का डी- रेमिट फीचर?
डी- रेमिट की सुविधा NPS सब्सक्राइबर्स को अपने पेंशन खाते में योगदान जमा करने का विकल्प देती है. इसके जरिए ग्राहक अपने टाईयर-1 और टाईयर-2 खातों में पैसा भेज सकते हैं. इस सुविधा के तहत एक विशिष्ट वर्चुअल अकाउंट नंबर का इस्तेमाल किया जाता है, ग्राहक पर्सनलाइज्ड QR कोड के माध्यम से भी UPI भुगतान कर सकते हैं. यह सुविधा साल 2022 में शुरू की गई थी.
लाखों NPS सब्सक्राइबर्स पर पड़ सकता है असर
NPS में करीब 2.34 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं और इस योजना के तहत 17.36 लाख करोड़ नहीं, बल्कि 17.36 ट्रिलियन रुपये यानी 17.36 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियां प्रबंधित की जा रही हैं. ऐसे में UPI योगदान पर शुल्क से जुड़े फैसले का असर बड़ी संख्या में रिटायरमेंट के लिए बचत करने वाले लोगों पर पड़ सकता है. फिलहाल PFRDA ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को अपना प्रस्ताव भेजा है. अब इस पर संबंधित अधिकारियों के फैसले का इंतजार है. जब तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं आता, तब तक NPS में UPI के जरिए योगदान करने वालों को यह नहीं मानना चाहिए कि प्रस्तावित छूट को अंतिम मंजूरी मिल चुकी है.
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