अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करते हैं या इसमें नया पेंशन खाता खोलने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह जानकारी आपके काम की है. पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने NPS से जुड़ी सेवाएं देने वाले Point of Presence (PoP) के नियमों में 10 बड़े बदलाव की तैयारी किए हैं. इस बदलाव का खास मकसद NPS सेवाओं को पहले के मुकाबले ज्यादा आसान और डिजिटल बनाना है. हालांकि, ये बदलाव अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं. PFRDA ने 2 अक्टूबर 2026 तक लोगों से सुझाव मांगे हैं.

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NPS में क्या-क्या बदल सकता है?

  • फिजिकल और डिजिटल PoP: PoP को दो कैटेगरी में बांटने का प्रस्ताव है. इस डिजिटल PoP के जरिए ग्राहक ऑनलाइन तरीके से NPS अकाउंट खोल और मैनेज करने जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंग. 
  • ज्यादा संस्थाएं बन सकेंगी PoP: LLP, सोसाइटी, ट्रस्ट और सहकारी समितियों जैसी कुछ संस्थाओं को भी तय शर्तों के साथ PoP बनने का मौका मिल सकता है.

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  • अलग आवेदन प्रक्रिया: फिजिकल और डिजिटल PoP के लिए अलग-अलग आवेदन प्रक्रियाएं हो सकती है. हालांकि फिजिकल PoP की आवेदन फीस 10,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का प्रस्ताव है, जबकि डिजिटल PoP के लिए कोई फीस नहीं होगी.
  • नई पात्रता शर्तें: फिजिकल PoP के लिए कम से कम पांच शाखाएं या ऑफिस होने की शर्त रखी जा सकती है.
  • वार्षिक शुल्क व्यवस्था: अभी PoP के लाइसेंस के नवीनीकरण व्यवस्था की अवधि 5 साल है. लेकिन अब इसे बदलकर हर साल शुल्क लेने का प्रस्ताव है.
  • छूट का दायरा बढ़ेगा: कुछ पात्रता शर्तों में PoP को और ज्यादा छूट देने का प्रस्ताव किया गया है.
  • अलग डिजिटल कलेक्शन अकाउंट: डिजिटल PoP को हर पेंशन योजना के लिए अलग कलेक्शन अकाउंट रखना पड़ सकता है. 
  • 'पेंशन एजेंट' का नाम बदलेगा: इस पेंशन एजें को अब 'NPS मित्र' नाम देने का प्रस्ताव है.
  • 7 दिन में रिपोर्टिंग: PoP में कई जरूरी बदलाव होने पर उसकी जानकारी PFRDA को सात दिनों के भीतर देनी पड़ सकती है.
  • निरीक्षण और ऑडिट शुल्क आसान होंगे: PoP के निरीक्षण और ऑडिट से जुड़े भुगतान नियमों को आसान बनाने का भी प्रस्ताव है.

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