Personal Loan Approval Process: कभी-कभी पर्सनल लोन बैंक ग्राहक के लिए सर का दर्द बन जाता है. अक्सर यह तब होता है, जब आपकी आयकर रिपोर्ट कुछ और कहती है तो दूसरी ओर बैंक स्टेटमेंट कुछ और दर्शाती है. आप यह सोचकर पर्सनल लोन के लिए अप्लाई करते है कि सब कुछ ठीक है. सैलरी टाइम से आ रही है. बैंक बैलेंस अच्छा है और तो और आप ने इनकम टैक्स रिटर्न भी फाइल कर रखा है. हालांकि दिक्कत उस समय आती है जब आईटीआर में बताई की आय आपके बैंक खाते में आने वाली राशि बिल्कुल भी मेल नहीं खाती है.
लोन स्वीकृति पर पड़ सकता है असर?
कई मामलों में हां कह सकते है. एक जरूरी चीज़ यह कि जब बैंक या लोन देने वाली संस्थाएं पर्सनल लोन अप्लाई का मूल्यांकन करती हैं तो वे केवल एक दस्तावेज़ नहीं देखतीं और कई दस्तावेजों की तुलना करती हैं, खास तौर से आपके आयकर रिपोर्ट और बैंक स्टेटमेंट की, ताकि यह समझ सकें कि आपकी आय स्टेबल और भरोसे लायक है या नहीं. ऐसे में यह आंकड़े मेल नहीं खाते तो लोनदाता ज्यादा सवाल पूछ सकते हैं, अप्रूवल में देरी कर सकते हैं या कुछ मामलों में आवेदन को अस्वीकार भी कर सकते हैं.
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लोन मंजूरी से पहले क्या जांचते हैं बैंक?
हमेशा से ही लोनदाताओं के लिए, लोन मंजूरी करना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है, वह यह है कि क्या उधारकर्ता आसानी से धन चुका सकता है? इसका जवाब देने के लिए, वे अक्सर आपके आयकर रिटर्न में कथित आय की तुलना आपके बैंक खाते में असल में आने वाली धनराशि से करते हैं. वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए, शर्तें आमतौर पर सीधी होती है, लेकिन फ्रीलांसरों, सलाहकारों, व्यवसाय मालिकों, गिग वर्करों या कई आय स्रोतों वाले लोगों के लिए, चीजें और भी मुश्किल हो सकती हैं. कभी-कभी, पैसा साइड प्रोजेक्ट, फ्रीलांस काम या अनौपचारिक कमाई से आता है जो टैक्स रिटर्न में तुरंत पूरी तरह से दर्शाया हुआ नहीं हो सकता है.
दस्तावेजों में मेल ना खाना मतलब लोन रिजेक्शन ?
आय संबंधी रिकॉर्ड में मेल ना खाने का मतलब यह नहीं है कि आपका लोन आवेदन हमेशा रिजेक्शन हो जाएगा. लेकिन इसके संबंध में ज्यादा जांच की जा सकती है. हालांकि लोनदाता आपके ओर से बताई गई आय और आपके खाते में जमा हुई राशि के बीच एक बड़ा फासला देखते हैं तो वे आपसे और भी दस्तावेज, स्पष्टीकरण या आय का प्रमाण मांग सकते हैं.
रुपी 112 के बिजनेस हेड कुलदीप युधुवंशी के मुताबिक, जब अंतर बहुत बड़ा होता है तो लोनदाता और भी सतर्क हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे तजुर्बे के अनुसार, जिन आवेदनों में बताई गई आय और बैंक रिकॉर्ड के बीच बड़ा गेप होता है, आमतौर पर 20-30% या उससे कई ज्यादा तो उस हालत में उनमें अंडरराइटिंग के दौरान रिजेक्शन की दर काफी अधिक होती है या ज्यादा सत्यापन स्तरों की संभावाना होती है. साफ शब्दों में कहें तो, आपके दस्तावेज़ दो बिल्कुल अलग-अलग चीज़ें बयां करता है तो लोनदाता इसे एक जोखिम के रूप में देख सकते हैं.
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साफ सुथरें दस्तावेज़ों से मंज़ूरी प्रक्रिया में तेज़ी
यह भी जानना और भी जरूरी हो जाता है कि साफ सुथरें दस्तावेजों से मंजूरी प्रक्रिया बिना रूकावट के चलती है. हालांकि लोन देने की प्रक्रिया कितनी भी समार्ट और लचीली होती जा रही हो, लेकिन लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है. इसी को लेकर युधुवंशी ने कहा, जिस ग्राहक का बैंक रिकोर्ड, आईटीआर और वित्तीय दस्तावेज मेल खाते है तो मुमकिन है तेजी से मंजूरी मिल जाती है. इतना ही नहीं, जिस भी एप्लिकेंट के वित्तीय दस्तावेज मेल खाते है तो उसका 40 प्रतिशत तेजी से अप्रूवल मिल जाता है.
