Pension Tax Rules India: हर महीने एक तय तारीख पर मिलने वाली पेंशन को अनकम्यूटेड पेंशन कहा जाता है. आयकर नियमों के मुताबिक, इस मासिक पेंशन को आपकी सैलरी माना जाता है और इसे ITR में "Income from Salary" के तहत दिखाना होता है. यानी इस नौकरी के बाद मिलनी वाली यह नियमित आय भी टैक्स्ट के दायरे में आती है. हालांकि, सशस्त्र बलों का कोई जवान जो शारीरिक विकलांगता के कारण रिटायर होता है, तो उन्हें मिलनी वाली पूरी विकलांगता पेंशन टैक्स-फ्री होती है.  

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जब कोई कर्मचारी भविष्य में एकमुश्त बड़ी रकम पाने के लिए अपनी मासिक पेंशन का कुछ हिस्सा छोड़ देता है, तो उसे कम्यूटेड पेंशन कहा जाता हैं. यह रकम एक बार में मिलती है और इसके टैक्स नियम अलग होते हैं. केंद्र या राज्य सरकार, स्थानीय निकाय या रक्षा सेवाओं से रिटायर कर्मचारियों को मिलने वाली यह एकमुश्त कम्यूटेड पेंशन पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है.

कम्यूटेड पेंशन पर टैक्स छूट के नियम

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अगर किसी कर्मचारी को रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी मिली है, तो उसकी कम्यूटेड पेंशन का सिर्फ एक-तिहाई (1/3) हिस्सा ही टैक्स-फ्री होगा. वहीं, अगर उसे ग्रेच्युटी नहीं मिली है, तो कुल पेंशन के 50% हिस्से तक टैक्स छूट मिल सकता है. बाकी इससे ऊपर की रकम पर टैक्स देना पड़ता है.

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फैमिली पेंशन का टैक्स कैसे तय होता है?

कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को मिलने वाली पेंशन को फैमिली पेंशन कहा जाता है. इसे सैलरी नहीं माना जाता, बल्कि "Income from Other Sources" के तहत रखा जाता है. अगर कोई सैनिक देश की सेवा करते हुए शहीद होता है, तो उनके परिवार को मिलने वाली पूरी पेंशन टैक्स-फ्री होती है, जो एक बड़ी राहत है. 

पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में फर्क

फैमिली पेंशन पर मिलने वाली छूट पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में काफी फर्क होता है. पुरानी व्यवस्था में कुल पेंशन का एक-तिहाई (1/3) या ₹15,000 (जो भी कम हो) टैक्स-फ्री रहता है. वहीं नई टैक्स व्यवस्था चुनने वालों के लिए छूट की यह सीमा बढ़ाकर ₹25,000 तक की जा सकती है.

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