RERA Rules for Delayed Possession: घर खरीदना ज्यादातर भारतीयों के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा निवेश होता है. लेकिन जब बिल्डर तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देता, तब खरीदारों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं. एक तरफ होम लोन की EMI चुकानी पड़ती है, दूसरी तरफ किराए का खर्च भी जारी रहता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बिल्डर ने वादा पूरा नहीं किया तो खरीदार क्या कर सकता है?

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देशभर में लाखों खरीदार हैं परेशान

रियल एस्टेट सेक्टर में देरी से पजेशन की समस्या नई नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में लाखों घर ऐसे हैं जिनका निर्माण या तो अटका हुआ है या तय समय से कई साल पीछे चल रहा है. कई प्रोजेक्ट्स में खरीदारों को 3 से 4 साल तक अतिरिक्त इंतजार करना पड़ा है, जिससे उनकी वित्तीय योजनाएं पूरी तरह प्रभावित हुई हैं.

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RERA देता है दो बड़े अधिकार

अगर बिल्डर तय समय पर फ्लैट का पजेशन नहीं देता है, तो खरीदार के पास दो प्रमुख विकल्प होते हैं. पहला, वह प्रोजेक्ट से बाहर निकलकर अपनी पूरी रकम ब्याज समेत वापस मांग सकता है. दूसरा, वह प्रोजेक्ट में बना रह सकता है और देरी की अवधि के लिए ब्याज या मुआवजे की मांग कर सकता है. रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी RERA ने खरीदारों को ये कानूनी अधिकार दिए हैं.

कब करनी चाहिए RERA में शिकायत?

विशेषज्ञों का कहना है कि खरीदारों को बार-बार मिलने वाले एक्सटेंशन का इंतजार नहीं करना चाहिए. यदि एग्रीमेंट में लिखी गई पजेशन डेट निकल चुकी है और बिल्डर कोई भरोसेमंद समयसीमा नहीं दे रहा है, तो RERA में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. कई मामलों में RERA ने खरीदारों के पक्ष में फैसला देते हुए बिल्डरों को ब्याज या रिफंड देने का आदेश दिया है.

क्या EMI देना बंद कर सकते हैं?

नहीं. बिल्डर और बैंक के साथ हुए समझौते अलग-अलग होते हैं. भले ही बिल्डर ने फ्लैट नहीं दिया हो, लेकिन बैंक को EMI समय पर चुकानी होगी. EMI रोकने पर पेनल्टी, खराब क्रेडिट स्कोर और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

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किराया और EMI दोनों का बोझ

फ्लैट में देरी का सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ता है जो एक साथ किराया और EMI दोनों भर रहे हैं. इससे मासिक बजट बिगड़ जाता है, बचत कम हो जाती है और कई बार लोगों को निवेश योजनाएं भी रोकनी पड़ती हैं. कुछ मामलों में टैक्स लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है.

कौन-कौन से दस्तावेज रखें संभालकर?

खरीदारों को अलॉटमेंट लेटर, सेल एग्रीमेंट, भुगतान रसीदें, बैंक स्टेटमेंट, होम लोन रिकॉर्ड, RERA रजिस्ट्रेशन डिटेल्स और बिल्डर के साथ हुई ईमेल या व्हाट्सएप बातचीत सुरक्षित रखनी चाहिए. यही दस्तावेज शिकायत या कानूनी कार्रवाई के दौरान सबसे मजबूत सबूत बनते हैं.