Pathankot Jogindernagar Rail: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पठानकोट-जोगिंदरनगर नैरोगेज रेल सेवा एक बार फिर शुरू हो गई है. करीब पौने चार साल बाद रेल संचालन बहाल होने से कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिली है. सेवा शुरू होने के पहले ही दिन यात्रियों में खासा उत्साह देखने को मिला और कई लोगों ने इस ऐतिहासिक रेल यात्रा का हिस्सा बनकर खुशी जाहिर की.
मंगलवार को कांगड़ा जिले के समेला रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में सांसद अनुराग ठाकुर, राज्यसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, विधायक पवन काजल और रणवीर सिंह ने संयुक्त रूप से रेल सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
क्षेत्र की जीवनरेखा फिर हुई बहाल
इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पठानकोट-जोगिंदरनगर रेल लाइन प्रदेश की जीवनरेखा मानी जाती है. इसके दोबारा शुरू होने से न केवल स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. रेल सेवा बंद रहने से क्षेत्र के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था.
रेल सेवा बहाल होने पर यात्रियों ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह ट्रेन पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक सुलभ और किफायती परिवहन साधन है. लंबे समय बाद ट्रेन के दोबारा चलने से लोगों की यात्रा आसान होगी और क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होगा.
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45 महीने बाद पटरी पर लौटी टॉय ट्रेन
पठानकोट-जोगिंदरनगर के बीच चलने वाली ऐतिहासिक कांगड़ा वैली टॉय ट्रेन सेवा लगभग पौने चार साल (करीब 45 महीने) के लंबे अंतराल के बाद फिर से शुरू हो गई है. अगस्त 2022 में भीषण बाढ़ के कारण चक्की नदी का रेलवे पुल बह गया था-जिसके बाद से यह रेल सेवा पूरी तरह से ठप थी.
लगभग ₹70 करोड़ की लागत से बने नए अत्याधुनिक पुल और रेल मंत्रालय द्वारा सुरक्षा निरीक्षण पूरे होने के बाद, यह ट्रेन 2 जून को फिर से पटरी पर लौट आई है. सेवा बहाल होने के बाद से ही यात्रियों, स्थानीय व्यापारियों और पर्यटकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है.
सस्ता और सुविधाजनक सफर
जहां एक ओर सड़क मार्ग (बस) से पठानकोट से जोगिंदरनगर जाने का किराया लगभग ₹392 है, वहीं ट्रेन का टिकट मात्र ₹40 के करीब है. आम जनता, व्यापारी और सब्ज़ी विक्रेता रोज़ाना इस ट्रेन के ज़रिए कम खर्च में पठानकोट तक का सफर आसानी से तय कर सकेंगे.
ट्रेन संख्या 62465 सुबह 5:00 बजे पठानकोट से रवाना होती है, वहीं दूसरी ट्रेन (संख्या 52467) सुबह 7:00 बजे चलती है.हिमाचल की ओर से ट्रेनें सुबह 8:30 बजे कांगड़ा स्टेशन से चलनी शुरू होती हैं.
97 साल पुराना है इस रेल लाइन का इतिहास
इस ट्रैक पर 1929 में रेल सेवा शुरू हुई थी. शुरुआत में भाप के इंजन से रेलगाड़ियां चलती थीं, लेकिन 1976 में डीजल इंजन आ गए और एक-एक कर तीन साल में 12 इंजन मिले थे. पठानकोट-जोगिंद्रनगर तक 164 किलोमीटर लंबे नैरोगेज रेल सेक्शन के नेशनल हेरिटेज में शामिल किया गया है.
रेलवे रिकाॅर्ड के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में बनाए जाने वाले हाइड्रोलिक पावर के निर्माण कार्य में सामग्री पहुंचाने के लिए पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज ट्रैक का निर्माण कार्य 1927 में शुरू किया गया था. दो वर्ष में ही अप्रैल 1929 में बिना मशीनों का प्रयोग किए मैनपावर से 164 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक का निर्माण पूरा कर लिया गया था.
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