NPS Vatsalya Scheme: आज के टाइम में हर माता-पिता अपने बच्चों का फ्यूचर सुरक्षित करना चाहते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने NPS वात्सल्य योजना शुरू की है. यह नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS का एक नया विस्तार है, जिसे खासतौर पर बच्चों के लिए डिजाइन किया गया है. इस योजना का मकसद कम उम्र से ही इन्वेस्ट शुरू करके लंबे टाइम में बड़ा फंड तैयार करना है.
NPS वात्सल्य अकाउंट कौन खुलवा सकता है?
NPS वात्सल्य अकाउंट किसी भी 18 साल से कम उम्र के बच्चे के नाम पर खोला जा सकता है. लेकिन इसका संचालन माता-पिता या कानूनी अभिभावक करते हैं, जैसे ही बच्चा 18 साल का हो जाता है , यह अकाउंट अपने आप रेगुलर NPS अकाउंट में बदल जाता है और फिर उसका प्रबंधन बच्चा खुद करता है. इस योजना में आय से जुड़ी कोई खास पाबंदी नहीं है, इसलिए परिवार आसानी से इसमें इन्वेस्ट कर सकते हैं.
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कैसे काम करता है इन्वेस्ट?
NPS वात्सल्य की संरचना काफी हद तक रेगुलर NPS जैसी ही है. इसमें माता-पिता अपनी सुविधा के मुताबिक, कभी भी छोटी या बड़ी रकम जमा कर सकते हैं. जमा किए गए पैसे को इक्विटी, सरकारी प्रतिभूतियों और दूसरे फिक्स्ड इनकम ऑप्शन में इन्वेस्ट किया जाता है. इन्वेस्टर्स अपनी जरूरत और जोखिम के हिसाब से इन्वेस्ट का ऑप्शन चुन सकते हैं. क्योंकि यह मार्केट से जुड़ी योजना है, इसलिए इसमें मिलने वाला रिटर्न तय नहीं होता. बाजार के प्रदर्शन के मुताबिक, रिटर्न ऊपर-नीचे हो सकता है.
कितना मिल सकता है रिटर्न?
बता दें कि पिछले कुछ सालों में NPS ने औसतन 8 से 10 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है. हालांकि, यह बाजार की स्थिति और इन्वेस्ट के तरीके पर निर्भर करता है. इस योजना का सबसे बड़ा फायदा लंबा टाइम माना जाता है. कम उम्र से इन्वेस्ट शुरू होने की वजह से बाजार के उतार-चढ़ाव का असर लंबे समय में कम हो सकता है और अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है.
लॉक-इन और निकासी के नियम
NPS वात्सल्य कोई शॉर्ट टर्म सेविंग प्लान नहीं है. इसमें पैसे निकालने पर कुछ पाबंदियां होती हैं और इसका मकसद लंबे टाइम तक इन्वेस्ट बनाए रखना है. 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद यह अकाउंट रेगुलर NPS अकाउंट में बदल जाता है और फिर उसी के नियम लागू होते हैं.
टैक्स में भी मिलता है फायदा
रेगुलर NPS की तरह NPS वात्सल्य में भी टैक्स लाभ मिलता है. इसमें किया गया इन्वेस्ट आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स कटौती के लिए योग्य होता है. इसके अलावा मैच्योरिटी के टाइम जमा राशि का कुछ हिस्सा टैक्स-फ्री निकाला जा सकता है, जबकि एन्युटी से मिलने वाली आय पर टैक्स लागू होता है.
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किन बातों का रखें ध्यान?
यह कोई फिक्स रिटर्न वाली योजना नहीं है. क्योंकि यह बाजार से जुड़ी हुई है, इसलिए कभी रिटर्न ज्यादा और कभी कम भी हो सकता है. साथ ही इसमें टाइम से पहले पैसे निकालने की सुविधा सीमित होती है. इसलिए यह योजना उन लोगों के लिए ज्यादा बेहतर मानी जाती है, जो लंबे टाइम तक इन्वेस्ट बनाए रखना चाहते हैं.
