अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करते हैं या रिटायरमेंट के लिए इसमें खाता खोलने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए अहम है. पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS की स्कीमों के नाम और उन्हें ऑनलाइन दिखाने के तरीकों में बदलाव किया गया है. यह नए नियम 1 दिसंबर 2026 से लागू होंगे. इसका मकसद निवेशकों के लिए अलग-अलग पेंशन फंड की योजनाओं को समझना और उनकी तुलना करने में आसानी देना है.

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नए नियमों के तहत पेंशन फंड अब अपनी स्कीम के नाम में A, B, C, D और E जैसे कैटेगरी कोड नहीं जोड़ेंगे. हालांकि, स्कीम किस तरह के निवेश के लिए है और उसमें कितना जोखिम है, इसकी जानकारी नाम के साथ अलग से देनी होगी.

NPS स्कीमों के नाम में क्या बदलेगा?

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PFRDA के नए नियमों के जेरिए पेंशन फंड को मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) की योजनाओं के नाम में A, B, C, D और E जैसे कैटेगरी कोड नहीं जोड़ने होंगे. अब स्कीम के नाम में पेंशन फंड का शॉर्ट नाम, NPS और योजना का एक अलग नाम शामिल होगा. ध्यान रहें कि रेगुलेटर ने निर्देश के मुताबिक नाम आसान और याद रखने लायक हों. 

उदाहरण के तौर पर किसी योजना का नाम 'XYZ NPS रिटायरमेंट स्कीम' हो सकता है. अगर एक ही फंड एक कैटेगरी में कई योजनाएं चलाता है, तो उनके नाम अलग-अलग रखने होंगे. Tier-I योजना के नाम में अलग से कुछ जोड़ने की जरूरत नहीं होगी, जबकि Tier-II के नाम के अंत में 'Tier II' लिखना जरूरी होगा.

क्या निवेशकों को रिस्क की जानकारी नहीं मिलेगी?

स्कीम के नाम से कैटेगरी कोड हटाने का यह मतलब नहीं है कि निवेशकों को अब जोखिम की जानकारी नहीं मिलेगी. PFRDA ने निर्देश दिया है कि पेंशन फंड को विज्ञापन, वेबसाइट, ब्रोशर और दूसरी सार्वजनिक जानकारी में स्कीम के नाम के साथ उसकी ग्रोथ कैटेगरी और रिस्क लेवल पर भी बताना होगा. यानी कि निवेशक योजना का नाम देखने के यह भी समझ सकेंगे कि उसमें कितना जोखिम है.

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