छोटू पैक पर बड़ा दांव! 10-20 रुपये के बोतल पर जंग शुरू, कोक-पेसी और कैम्पा कोला अब आमने-सामने
बाजार में कोल्ड ड्रिंक्स ला रही नई कंपनियां 10-20 रुपये में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स के छोटू पैक पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. इनका मार्केट शेयर भी बढ़ा है. यह बड़ी कंपनियों के लिए एक चुनौती है.

Cola wars: गर्मियां आते ही सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में हलचल सी मच जाती है. इस साल कंपनियों में मुकाबला और भी तेज होने वाला है. क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में नए आए प्लेयर्स 10-20 रुपये में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स के छोटू पैक पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं.
इस कैटेगरी में इनका मार्केट शेयर पिछले कारोबारी साल में बढ़कर अनुमानित 6-7 परसेंट तक चला गया, जो 2024 में सिर्फ 2 परसेंट ही था. इस बढ़ते मुकाबले को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि पहले से बाजार में धाक जमा चुकीं बड़ी कंपनियां अपने मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन पर खर्च बढ़ाएंगी. साथ ही अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी और डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विस्तार करेगी.
छोटू पैक्स का क्या है मामला?
दरअसल, 10-20 रुपये वाली कोल्ड ड्रिंक की छोटी बोतल लोगों को ज्यादा पसंद आती है. चलते-फिरते प्यास लगने पर लोग इन्हें खरीदना आसान समझते हैं. कुछ घूंट में खत्म भी हो जाती है, प्यास भी बुझ जाती है, इंसान रिलैक्स्ड भी हो जाता है और कैरी करने की भी कोई चिंता नहीं होती है.
यही वजह है कि रिलायंस के Campa cola जैसे कई नए कोल्ड ड्रिंक ब्रांड्स इस पर फोकस ज्यादा कर रहे हैं, जिसके चलते बीते कुछ सालों में इनका मार्केट शेयर भी तेजी से बढ़ा है. हालांकि, यह कोका-कोला, पेप्सी जैसी पुरानी कंपनियों के लिए टेंशन वाली बात है कि कहीं उनका बाजार हाथ से न निकल जाए. ऐसे में अब इन कंपनियों को भी अपने छोटे पैक की उपलब्धता बढ़ानी होगी ताकि हर गली, सड़क, नुक्कड़ पर इनका भी छोटू पैक चिलचिलाती धूप में लोगों के हाथ नजर आए.
ग्रामीण बाजार पर कब्जा
छोटू पैक के जरिए अगर मार्केट शेयर बढ़ाना है, तो ग्रामीण भारत सबसे बेहतर विकल्प है. यहां अकसर लोग 40-50 रुपये की बड़ी बोतल नहीं खरीदना चाहते हैं. ऐसे में 10 रुपये का पैक ग्रामीण भारत के लिए 'मैजिक पॉइंट' के तौर पर काम करता है. इस बीच, देश के कई हिस्सों में Jayanti, Hajoori जैसे रीजनल ब्रांड्स का भी दबदबा है इसलिए मुकाबला और भी बड़ा होता जा रहा है.
खूब होगी कमाई
मंगलवार को जारी क्रिसिल की रिपोर्ट में यह भी बताया कि भले ही कंपनियों के बीच मुकाबला तेज होता जा रहा है. बावजूद इसके सॉफ्ट ड्रिंक बॉटलर्स की इस वित्त वर्ष में कमाईफिर से बढ़ने की उम्मीद है. पिछले साल की सुस्ती के बाद इनकी कमाई इस बार अपने लंबे समय के औसत विकास दर 15 परसेंट तक पहुंच सकती है. इसकी वजह ज्यादा गर्मी और बढ़ता हुआ तापमान है.
गर्मियों के महीनों में कुल बिक्री का 40 परसेंट हिस्सा आता है. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी से भले ही पैकेजिंग कॉस्ट पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर उद्योग के मुनाफे पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है. इससे मुनाफा 250 बेसिस पॉइंट्स (bps) तक कम हो सकता है.
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Source: IOCL


























