न यात्रा कराई, न पैसे लौटाए, तीर्थ यात्रियों को अब कंपनी देगी 8.62 लाख रुपए
केरल में तीर्थ यात्रियों की शिकायत पर उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को 8.62 लाख रुपए ब्याज समेत लौटाने और हर शिकायतकर्ता को 1 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है.

केरल में तीर्थ यात्रा का सपना लेकर कुछ लोगों ने टूर पैकेज बुक किया था. लेकिन श्रद्धालुओं को जब यात्रा पर जाने का मौका ही नहीं मिला और पैसे भी वापस नहीं किए गए, तो मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया. मामला केरल के कासरगोड जिला का है. यहां उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने टूर ऑपरेटर और सभी जिम्मेवार लोगों को श्रद्धालुओं को 8.62 लाख रुपए की रकम ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया है.
आयोग ने इसके अलावा हर शिकायतकर्ता को 1 लाख रुपए का मुआवजा और 3000 रुपए मुकदमेबाजी खर्च के तौर पर देने का भी आदेश दिया है.
कितने में बुक हुई थी तीर्थ यात्रा?
बता दें कि केरल के कुछ श्रद्धालुओं ने एक टूर पैकेज बुक किया था, जिसमें मंगलुरु से दिल्ली, अयोध्या, वाराणसी और गया की यात्रा शामिल थी. टूर ऑपरेटर ने इस पैकेज की कीमत 47,750 रुपए प्रति व्यक्ति बताई थी. पैकेज में दिल्ली में ठहरने की व्यवस्था भी बताई गई थी.
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, कंपनी ने शुरुआत में टूर की कीमत का 50 फीसदी एडवांस पैसा ले लिया और बाद में 25 फीसदी एक्स्ट्रा पैसे भी लिए. श्रद्धालुओं का दावा है कि उन्होंने मिलकर कंपनी को टोटल 8.62 लाख रुपए का पेमेंट किया था.
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फिर कहां हुई दिक्कत?
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कंपनी ने बिना पहले से जानकारी दिए यात्रा को कैंसिल कर दिया. इसके बाद न तो ट्रेन और ना ही फ्लाइट टिकट की व्यवस्था की गई. इतना ही नहीं ठहरने के लिए होटल भी नहीं बुक किया गया.
यात्रा कैंसल होने के बाद श्रद्धालुओं ने कंपनी से पैसे वापस मांगते हुए कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन कंपनी ने पैसे वापस नहीं किए. इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायद दर्ज करा दी.
आयोग ने क्या कहा?
कासरगोड जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि श्रद्धालुओं ने टूर ऑपरेटर के एड और वादे पर भरोसा करके अपने पैसे जमा कराए थे. उन्होंने यात्रा के लिए टोटल फीस का 75 फीसदी तक पेमेंट भी कर दिया था. लेकिन यात्रा पूरी नहीं होने से शिकायतकर्ताओं को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव और परेशानी भी हुई है. इसलिए आयोग ने पेमेंट किए गए पैसे ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया है.
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कितना मिलेगा मुआवजा?
आयोग ने सिर्फ 8.62 लाख रुपए वापस करने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि हर शिकायतकर्ता को 1 लाख रुपए मुआवजा देने और 3000 रुपए कानूनी खर्च के रूप में भुगतान करने को कहा गया है. आदेश के मुताबिक, ये पेमेंट आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर किया जाना है.





















