Electricity Connection News: अगर किसी संपत्ति पर आपका कब्जा है और आप वहां बिजली कनेक्शन लेना चाहता है, तो सिर्फ मालिकाना हक का विवाद होने के आधार पर आपको बिजली से वंचित नहीं किया जा सकता. कलकत्ता हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है कि बिजली गरिमापूर्ण जीवन के लिए बेहद जरूरी है और कब्जे को लेकर विवाद होने के बावजूद बिजली कनेक्शन से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी संपत्ति पर बिजली कनेक्शन मिलने का मतलब यह नहीं है कि उस व्यक्ति को उस संपत्ति का मालिकाना हक भी दे दिया गया है. 

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क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, एक महिला ने एक संपत्ति के लिए नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए आवेदन किया था. इसके बाद महिला ने संपत्ति पर अपना अधिकार और कब्जा होने का दावा करते हुए CESC से नया बिजली कनेक्शन देने की मांग की थी. लेकिन बिजली कंपनी ने मकान मालिकों की आपत्ति का हवाला देते हुए कनेक्शन देने से इनकार कर दिया था.

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महिला ने इसके बाद अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया. दूसरी ओर, मकान मालिकों ने महिला के दावे को खारिज करते हुए कहा कि जिस डॉक्यूमेंट्स के आधार पर वह संपत्ति पर अपना अधिकार बता रही है, वह कानूनी रूप से वैध नहीं है और कथित तौर पर फर्जी भी है. साथ ही उन्होंने महिला के खिलाफ चल रहे बेदखली मुकदमे का भी हवाला दिया.

हाई कोर्ट ने बिजली कनेक्शन पर क्या कहा?

मामले की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट की पीठ ने कहा कि बिजली एक जरूरी सुविधा है. ऐसे में किसी कब्जेदार को भी सिर्फ इस आधार पर बिजली से वंचित नहीं किया जा सकता कि संपत्ति को लेकर उसका मालिकाना हक पर विवाद चल रहा है.

अदालत ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार बिजली जैसी आवश्यक सुविधा तक पहुंच से जुदा हुआ है. इसलिए जब तक सक्षम सिविल कोर्ट महिला के संपत्ति से बेदखली का आदेश जारी नहीं करता, तब तक उसे सिर्फ विवाद के आधार पर बिजली आपूर्ति से वंचित नहीं किया जा सकता है. इसके बाद अदालत ने कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉरपोरेशन (CESC) को महिला को तीन सप्ताह के भीतर बिजली कनेक्शन देने का आदेश दिया. 

बिजली कनेक्शन मिलने से मालिकाना हक मिलेगा?

हाई कोर्ट ने यह साफ किया कि महिला को बिजली कनेक्शन देने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने उसके संपत्ति संबंधी दावे को स्वीकार कर लिया है. उन्होंने सिर्फ बिजली कनेक्शन देने की बात कही है. ऐसे में बिजली मिलना और संपत्ति का मालिक होना, दोनों अलग-अलग कानूनी मुद्दा है.

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