अक्सर शहरों और कस्बों में ऐसे कई इलाके होते हैं जहां आसपास कोई मेडिकल स्टोर नहीं होता. ऐसे में लोगों को दवाइयां लेने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है. अगर आपके इलाके में भी मेडिकल स्टोर की कमी है तो आप सरकार की मदद से जन औषधि केंद्र खोल सकते हैं. यह न सिर्फ एक अच्छा बिजनेस अवसर बन सकता है बल्कि लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने का जरिया भी बनता है.
सरकार प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत देशभर में ऐसे केंद्र खोलने को बढ़ावा दे रही है. यहां जेनेरिक दवाइयां बाजार में मिलने वाली ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में काफी कम कीमत पर मिलती हैं. अच्छी बात यह है कि अब इस केंद्र को खोलने की प्रोसेस पहले के मुकाबले काफी आसान कर दी गई है. जान लीजिए तरीका.
क्या होता है जन औषधि केंद्र?
जन औषधि केंद्र एक तरह का मेडिकल स्टोर होता हैय जहां लोगों को कम कीमत में अच्छी क्वालिटी वाली जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं. इन दवाइयों का असर और क्वालिटी ब्रांडेड दवाइयों के बराबर मानी जाती है. लेकिन इनकी कीमत काफी कम होती है. कई दवाइयां 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती मिलती हैं.
इस योजना का मकसद आम लोगों के इलाज का खर्च कम करना है. जिससे हर व्यक्ति जरूरी दवाइयां आसानी से खरीद सके. सरकार चाहती है कि आने वाले समय में देश के ज्यादा से ज्यादा शहरों और कस्बों में जन औषधि केंद्र खोले जाएं. जिससे बड़ी आबादी को इसका फायदा मिल सके.
ऐसे करें जन औषधि केंद्र के लिए आवेदन
अगर आप जन औषधि केंद्र खोलना चाहते हैं तो इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है. इसके लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट janaushadhi.gov.in पर जाना होगा. वेबसाइट पर जाने के बाद Apply Online विकल्प पर क्लिक करके आवेदन फॉर्म भरना होता है. इसमें आवेदक को अपनी व्यक्तिगत जानकारी और जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी.
इसके बाद जरूरी दस्तावेज अपलोड करके फॉर्म जमा करना पड़ता है. आवेदन जमा होने के बाद विभाग की ओर से दस्तावेजों की जांच की जाती है. अगर सभी शर्तें पूरी होती हैं. तो आवेदन को मंजूरी दे दी जाती है और इसके बाद आप अपने इलाके में जन औषधि केंद्र शुरू कर सकते हैं.
कौन खोल सकता है केंद्र?
जन औषधि केंद्र खोलने के लिए कई तरह के लोग आवेदन कर सकते हैं. इसमें व्यक्तिगत कारोबारी, रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट, डॉक्टर, गैर सरकारी संगठन, चैरिटेबल ट्रस्ट और निजी अस्पताल शामिल हैं. हालांकि इसके लिए दवाइयां बेचने का वैलिड लाइसेंस और दुकान के लिए पर्याप्त जगह होना जरूरी होता है. सरकार कुछ कैटेगरी के लोगों को आर्थिक सहायता भी देती है. जिनमें महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग, दिव्यांगजन और पूर्व सैनिकों को केंद्र शुरू करने के लिए 2 लाख रुपये तक की मदद मिल सकती है.
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