Health Insurance Claim: देश के कई राज्यों में चिलचिलाती गर्मी का कहर लगातार जारी है. ऐसे में भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है, लोग अपने घरों से बाहर तक निकलना पसंद नहीं कर रहे हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ भीषण गर्मी की वजह से हीट स्ट्रोक के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी भी देखने को मिल रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि अगर लू की वजह से किसी की तबीयत खराब हो जाए तो क्या हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत इसका क्लेम मिल पाएगा या फिर नहीं?
क्या हीट स्ट्रोक इंश्योरेंस में होता है कवर?
यहां इस बात को समझना बेहद ही जरूरी है कि हीट स्ट्रोक इंश्योरेंस कवर करता है या नहीं. जिसको लेकर कई बीमा विशेषज्ञों ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि भारत में अधिकतर सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के तहत हीट स्ट्रोक से जुड़ी बीमारियों के इलाज को ही सिर्फ और सिर्फ कवर किया जाता है. लेकिन, कुछ नियमों के मुताबिक, यह पूरी तरह से आपकी पॉलिसी के शर्तों पर ही निर्भर करता है.
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क्या अस्पताल में भर्ती होना है जरूरी?
दरअसल, हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम का बड़ा फायदा उठाने के लिए सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि मरीज को डॉक्टर की लिखित सलाह पर अस्पताल में भर्ती कराया गया हो.
कैशलेस और रीइम्बर्समेंट की सुविधा
तो वहीं, अगर मरीज का इलाज इंश्योरेंस कंपनी के नेटवर्क अस्पताल में होता है, तो वह मरीज बिना किसी परेशानी के कैशलेस इलाज का भी आसानी से फायदा उठा सकता है. लेकिन, गैर-नेटवर्क अस्पताल में इलाज कराने पर डिस्चार्ज के बाद सभी मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टर के पर्चे और तमाम बिलों को जमा करने के बाद ही रीइम्बर्समेंट क्लेम मरीज द्वारा लिया जा सकता है.
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हांलाकि, पॉलिसीधारकों को एक बड़ी सलाह यह भी दी जाती है कि वे अपनी पॉलिसी लेने से पहले एक बार ध्यान से जरूर पढ़ें, ताकि मौसम से जुड़ी बीमारियों पर ज्यादा से ज्यादा कवरेज किया जा सके.
