Inverter Using Tips: मार्च का महीना आ चुका है. धीरे-धीरे गर्मियों की दस्तक भी होने लगी है. गर्मी बढ़ते ही पावर कट की टेंशन फिर लौट आती है. ऐसे में घर का इन्वर्टर ही सबसे बड़ा सहारा बनता है. लेकिन कई लोग एक आम परेशानी से जूझते हैं. बैटरी बार-बार डिस्चार्ज हो रही है. रात भर चार्ज करने के बाद भी बैकअप कम मिल रहा है. पंखे धीमे चल रहे हैं या लाइट जल्दी चली जाती है. ऐसे में लोग सोचते हैं कि बैटरी खराब हो गई. 

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अब नई लेनी पड़ेगी. लेकिन हर बार प्राॅब्लम बैटरी बदलने लायक नहीं होती. कई बार छोटी सी लापरवाही, गलत सेटिंग या मेंटेनेंस की कमी इसकी वजह बनती है. नई बैटरी पर हजारों रुपये खर्च करने से पहले कुछ बेसिक चीजें चेक कर लें. इससे अच्छी खासी बचत हो सकती है और बैटरी की लाइफ भी बढ़ेगी. जान लें तरीके.

यह वजह होती है बैटरी डिस्चार्ज होने की

इन्वर्टर की बैटरी डिस्चार्ज होने के पीछे जो सबसे बड़ी वजह है. वह होता है लोड अक्सर घर में जरूरत से ज्यादा उपकरण इन्वर्टर पर जोड़ दिए जाते हैं. फ्रिज, आयरन, वॉटर पंप या ज्यादा वाट के कूलर जैसे हाई पावर डिवाइस बैटरी पर भारी दबाव डालते हैं. इन्वर्टर की क्षमता 800VA है और लोड उससे ज्यादा चला रहे हैं. तो बैटरी जल्दी बैठ जाएगी. दूसरी बात बैटरी को पूरी तरह डिस्चार्ज होने देना भी नुकसान करता है. 

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बैटरी बार-बार डीप डिस्चार्ज से उसकी स्टोरेज कैपेसिटी घटती जाती है. कोशिश करें कि जरूरी लाइट, पंखा और कम चीजें ही बैकअप पर चलें. इन्वर्टर की रेटिंग और बैटरी की Ah कैपेसिटी के हिसाब से लोड सेट करें. अगर जरूरत ज्यादा है. तो पैरेलल बैटरी जोड़ने या ज्यादा कैपेसिटी वाले सिस्टम पर शिफ्ट होने का सोच सकते हैं.

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इन सेटिंग्स को कर लें ठीक

कई लोग सालों तक बैटरी की सर्विसिंग नहीं कराते. अगर आपकी बैटरी ट्यूबलर या लीड एसिड है. तो उसमें डिस्टिल्ड वाटर का लेवल रेगुलर चेक करना जरूरी है. पानी कम हुआ तो प्लेट्स सूखने लगती हैं और बैटरी जल्दी डिस्चार्ज दिखाने लगती है. टर्मिनल पर जंग या ढीले कनेक्शन भी चार्जिंग को प्रभावित करते हैं. इन्हें बीच-बीच में साफ करते रहें और यह भी देख लें कि कनेक्शन ठीक से टाइट हैं.

इसके साथ ही इन्वर्टर की चार्जिंग करंट सेटिंग भी देख लें. कई बार गलत मोड जैसे हाई चार्ज या लो चार्ज का गलत चयन, बैटरी की सेहत बिगाड़ देता है. अगर वोल्टेज इनपुट लगातार कम है. तो बैटरी पूरी तरह चार्ज ही नहीं हो पाती. ऐसे में स्टेबल पावर सप्लाई या स्टेबलाइजर पर ध्यान देना चाहिए. यह छोटे कदम बैटरी की लाइफ बढ़ाते हैं और बेवजह नए खर्च से बचाते हैं. 

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