Health Insurance: आजकल मेडिकल खर्च बहुत ज्यादा हो गया है, इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस एक अच्छा विकल्प माना जाता है. लोगों को अक्सर गलतफहमी होती है कि अगर उनके पास अच्छी बीमा राशि वाली पॉलिसी है, तो अस्पताल का पूरा बिल आसानी से कवर हो जाएगा. लेकिन कई बार पॉलिसी में मौजूद कुछ नियमों, कटौतियों और शर्तों के कारण लोगों को इलाज का कुछ खर्च अपनी जेब से भी भरना पड़ता है. पॉलिसी लेने से पहले पॉलिसी धारकों को सभी शर्तो और नियमों को ध्यान से समझना चाहिए.
कमरे के किराए की सीमा
कमरे की तय सीमा से ज्यादा महंगा कमरा लेने पर कमरे के करिए के साथ- साथ डॉक्टर की फीस, नर्सिंग चार्ज और बाकी खर्च भी खुद भरना पड़ता है.
वेटिंग पीरियड कवरेज में देरी
वेटिंग पीरियड वह समय होता है जिसके दौरान पॉलिसी लेने के बाद कुछ बीमारियों या इलाज का खर्च बीमा कंपनी नहीं देती. अगर कोई बीमारी पहले से है तो उसके लिए कुछ महीनों से लेकर कई साल तक का वेटिंग पीरियड हो सकता है. हर बीमारी का वेटिंग पीरियड अलग-अलग होता है जैसे मोतियाबिंद. अगर इस अवधि के दौरान इलाज की जरूरत पड़ती है तो क्लेम नहीं मिल सकता.
कुछ खर्च हेल्थ इंश्योरेंस में कवर नहीं होते
गैर-चिकित्सीय खर्च जैसे रजिस्ट्रेशन फीस और कुछ अन्य सुविधाएं हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल नहीं होती हैं. अस्पताल के बिल में दस्ताने, मास्क और ऐसी कई दूसरी चीजें भी जुड़ी होती हैं. इन चीजों का पैसा मरीज को अपनी जेब से देना पड़ सकता है.
गैस बिल कम करना चाहते हैं? पहले जान लें LPG और PNG में से कौन-सा विकल्प है ज्यादा किफायती
कुछ इलाजों पर खर्च की सीमा तय होती है
कई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में कुछ खास इलाज जैसे मोतियाबिंद का ऑपरेशन, एम्बुलेंस का किराया या कुछ जांचों के खर्च की सीमा तय होती है. जिस वजह से बीमा राशि ज्यादा होने के बावजूद बीमा कंपनी सिर्फ तय सीमा तक ही भुगतान करती है.
को-पेमेंट की शर्ते
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में को-पेमेंट का सिस्टम होता है. को-पेमेंट का मतलब है कि क्लेम का एक हिस्सा बीमा कंपनी देती है और कुछ हिस्सा पॉलिसीधारक को अपनी जेब से देना होता है. जैसे मन लीजिये की को-पेमेंट 10% है तो मंजूर क्लेम राशि का 10% पॉलिसीधारक को देना होगा. को-पेमेंट अक्सर सीनियर सिटीजन और कम प्रीमियम वाली पॉलिसियों में देखने को मिलता है.
हर इलाज हेल्थ इंश्योरेंस में कवर नहीं होती
कुछ पॉलिसियों में कॉस्मेटिक सर्जरी, बांझपन का इलाज और कुछ दूसरी बीमारियां या इलाज शामिल नहीं होते. जिस वजह से बीमा कंपनी इन पर क्लेम नहीं देती.इसलिए पॉलिसी लेने से पहले नियम और शर्तो को ध्यान से पढ़ना चाहिए.
कैशलेस इलाज की सुविधा
कैशलेस इलाज की सुविधा को देखते हुए कई लोग हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते हैं. लेकिन यह समझना जरूरी है कि कैशलेस इलाज सिर्फ उन्हीं अस्पतालों में मिलता है जो बीमा कंपनी के नेटवर्क में शामिल होते हैं. इसलिए इलाज कराने से पहले यह जरूर जांच लें कि अस्पताल आपकी बीमा कंपनी के नेटवर्क में है या नहीं.
10 साल बाद किसकी जेब में आया ज्यादा पैसा? एक्टिव और पैसिव फंड्स के परफॉर्मेंस की पूरी जन्मकुंडली
पॉलिसी खरीदने से पहले ध्यान से पढ़े
हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ खरीद लेना ही काफी नहीं होता, उसके नियमों और शर्तो को भी ध्यान से पढ़कर समझना चाहिए. पॉलिसी खरीदते या रिन्यू करवाते समय वेटिंग पीरियड और दूसरी जरूरी शर्तो की सही जानकारी होनी चाहिए. आपकी यही जागरूकता भविष्य में कई परेशानियों से बचा सकती है.
