Induction Cooktops Using Tips: मिडिल ईस्ट में इन दिनों तनाव की स्थिति बनी हुई है. अमेरिका और इज़राइल की तरफ से ईरान पर हमले के बाद हालात और ज्यादा सीरियस हो गए हैं. इसका असर सिर्फ उस इलाके तक लिमिटेड नहीं है. बल्कि ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है. खास तौर परस्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाली तेल और गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.
भारत में भी लोग घरेलू रसोई व्यवस्था को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं. गैस सिलेंडर की कीमत भी बढ़ गई है. अब इस बीच कई घरों में इंडक्शन कुकटॉप की मांग तेजी से बढ़ रही है. लोग इसे गैस के ऑप्शन या बैकअप के तौर पर खरीद रहे हैं. ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि इंडक्शन चलाने पर कितनी बिजली खर्च होती है.
बाजार में क्यों बढ़ रही इंडक्शन की मांग?
इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकटॉप खरीदने वालों की संख्या बढ़ी है. कई लोग इसे एहतियात के तौर पर घर में रख रहे हैं. जिससे गैस सिलेंडर देर से आए या खत्म हो जाए तो खाना बनाने में दिक्कत न हो.
इंडक्शन कुकटॉप के कुछ फायदे भी होते हैं:
- इसमें खाना जल्दी बन जाता है.
- गैस की तरह धुआं या गंदगी नहीं होती.
- इसे चलाना और साफ करना आसान होता है.
- बिजली होने पर कभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
इन्हीं वजहों से कई परिवार अब गैस के साथ साथ इंडक्शन को भी रसोई का हिस्सा बना रहे हैं.
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1 घंटा चलाने पर कितनी बिजली खर्च होती है?
ज्यादातर लोगों के मन में यही सवाल रहता है कि इंडक्शन चलाने से बिजली का बिल कितना बढ़ेगा. दरअसल इसकी खपत उस मशीन की कैपेसिटी पर डिपेंड करती है.
आमतौर पर घरेलू इंडक्शन कुकटॉप की कैपेसिटी इस तरह होती है:
- 1200 वॉट का इंडक्शन
- 1500 वॉट का इंडक्शन
- 2000 से 2200 वॉट तक के मॉडल
अगर कोई व्यक्ति 2000 वॉट का इंडक्शन एक घंटे तक चलाता है तो लगभग 2 यूनिट बिजली खर्च होती है. वहीं 1200 वॉट के इंडक्शन को एक घंटे चलाने पर करीब 1.2 यूनिट बिजली की खपत होती है. इसलिए इस्तेमाल के समय और पावर के हिसाब से बिजली बिल तय होता है.
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गैस के साथ बैकअप रखना क्यों जरूरी?
ऊर्जा बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि जब ग्लोबल लेवल पर तनाव बढ़ता है तो तेल और गैस की आपूर्ति पर असर पड़ना स्वाभाविक है. ऐसे समय में कीमतों और सप्लाई दोनों में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
रसोई में ऑप्शनल उपकरण क्या हो सकते है:
- इंडक्शन कुकटॉप
- इलेक्ट्रिक केतली
- माइक्रोवेव या ओटीजी
इन उपकरणों की मदद से गैस खत्म होने की स्थिति में भी खाना बनाना आसान हो जाता है. हालांकि साथ ही यह समझना जरूरी है कि बिजली से चलने वाले इन उपकरणों से बिजली की खपत भी बढ़ती है. इसलिए उपयोग सोच समझकर करना चाहिए.
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