Insurance News: भारत में बड़ी संख्या में लोग अब अपनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योरिटी से पहले ही बंद कर रहे हैं. सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीते वित्त वर्ष में सरेन्डर और समय से पहले निकासी पर दिया गया भुगतान पहली बार मैच्योरिटी पर किए गए भुगतान से भी ज्यादा रहा. लोग अपनी पॉलिसी चला नहीं पा रहे हैं, अब इसके पीछे क्या कारण हैं और इससे क्या नुकसान है, ये आप यहां से समझ सकते हैं. 

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क्या कहते हैं आंकड़े?सरकारी आंकड़ों के अनुसार, FY26 में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा किए गए टोटल बेनिफिट पेआउट में करीब 39% हिस्सा सरेन्डर और समय से पहले निकासी का रहा, जबकि मैच्योरिटी बेनिफिट का हिस्सा सिर्फ 37% ही रहा. यानी पहली बार समय से पहले पॉलिसी छोड़ने वालों की संख्या मैच्योरिटी तक पहुंचने वालों से ज्यादा  दिखी है. 

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बीच में पॉलिसी क्यों छोड़ रहे हैं लोग?देखा जाए तो पॉलिसी छोड़ने के पीछे कई खास- खास कारण हो सकते हैं. बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव के चलते कई लोगों को पैसों की जरूरत पड़ रही है, जिसके कारण वे पॉलिसी सरेंडर कर रहे हैं. वहीं, कुछ मामलों ज्यादा प्रीमियम या पॉलिसी की शर्तों को ठीक से न समझ पाने की वजह से भी लोग बीच में ही बाहर निकल जाते हैं.

पॉलिसी सरेंडर करने का क्या नुकसान है?लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी समय से पहले बंद करने पर अक्सर ग्राहक को पूरी रकम वापस नहीं मिलती. कई योजनाओं में सरेंडर वैल्यू कम होती है और लंबे समय तक मिलने वाले बीमा कवर का भी नुकसान हो जाता है. इसके अलावा, इंवेस्टमेंट पर मिलने वाला रिटर्न भी कम हो सकता है.

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पॉलिसी लेने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?हमेशा पॉलिसी लेते समय अपनी सैलरी के अनुसार ही प्रीमियम चुनें, केवल टैक्स बचाने के लिए पॉलिसी न खरीदें. साथ ही पॉलिसी के नियम, सरेंडर चार्ज और फायदों को अच्छी तरह समझें. एजेंट की बातों में न आएं, डॉक्यूमेंट्स जरूर पढ़ें.