भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क में एक बड़ा बदलाव करने के करीब पहुंच गया है. देश में अब 99 फीसदी से ज्यादा ट्रेनें बिजली से चलाने की व्यवस्था तैयार हो चुकी है. रेलवे के सामने अब केवल 191 रूट किलोमीटर ट्रैक पर विद्युतीकरण का काम पूरा करने की चुनौती है. इसके बाद रेलवे अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य के और करीब पहुंच जाएगा.

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क में अब केवल 191 रूट किलोमीटर का विद्युतीकरण बाकी है. ये रेलखंड तीन राज्यों में मौजूद हैं. विद्युतीकरण का मतलब रेलवे ट्रैक के ऊपर बिजली की लाइनें लगाना है, ताकि ट्रेनें डीजल के बजाय बिजली से चल सकें. रेलवे लंबे समय से अपने नेटवर्क को बिजली से जोड़ने पर काम कर रहा है. इसका मकसद ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाना और डीजल पर निर्भरता कम करना है.

डीजल की खपत में आई बड़ी कमी

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रेलवे नेटवर्क में बिजली से चलने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ने का असर डीजल की खपत पर भी पड़ा है. रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त साल 2015-16 में ट्रेनों को चलाने के लिए लगभग 293 करोड़ लीटर डीजल का इस्तेमाल हुआ था. वहीं, वित्त साल 2024-25 में यह आंकड़ा घटकर करीब 108 करोड़ लीटर रह गया इससे पता चलता है कि रेलवे में बिजली का इस्तेमाल बढ़ने से डीजल की जरूरत कम करने में मदद मिली है. इससे ईंधन पर होने वाले खर्च को घटाने का भी अवसर मिलता है.

पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है विद्युतीकरण?

डीजल से चलने वाले इंजन धुआं छोड़ते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है. बिजली से चलने वाली ट्रेनों के इस्तेमाल से रेलवे के सीधे परिचालन के दौरान होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इसका पर्यावरणीय लाभ इस बात पर भी निर्भर करता है कि बिजली किस स्रोत से बनाई जा रही है.

अब बाकी काम पूरा करने पर नजर

रेलवे के लिए बचे हुए 191 रूट किलोमीटर पर विद्युतीकरण पूरा करना महत्वपूर्ण है. इससे बिजली से ट्रेन चलाने की सुविधा का दायरा और बढ़ेगा. साथ ही, डीजल पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा की बचत करने और रेल परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी.

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