ट्रेन चलाने वाले लोको पायलटों के लिए ड्यूटी के दौरान शराब से पूरी तरह दूर रहना जरूरी है. रेलवे के मौजूदा नियमों के मुताबिक, उनके खून में अल्कोहल की मात्रा जीरो होनी चाहिए. हालांकि, अब इस नियम को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें सांस की जांच में अल्कोहल नहीं मिला, लेकिन खून की जांच में इसकी थोड़ी मात्रा पाई गई. ऐसे में रेलवे के सामने यह तय करने की चुनौती है कि अल्कोहल की कितनी मात्रा को ड्यूटी के लिए फिट माना जाएगा.
दरअसल, यह मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि लोको पायलट की एक छोटी सी लापरवाही यात्रियों की सुरक्षा पर काफी बड़ा असर डाल सकती है. वहीं, लोको पायलटों के संगठनों का कहना है कि कुछ परिस्थितियों में बिना शराब पिए भी खून में अल्कोहल की बहुत कम मात्रा मिल सकती है.
लोको पायलटों के लिए क्या हैं अल्कोहल टेस्ट के नियम?
इंडियन रेलवे मेडिकल मैनुअल (IRMM) के पैराग्राफ 565 के मुताबिक, ट्रेन चलाने वाले कर्मचारियों के खून में अल्कोहल की मात्रा जीरो होना चाहिए. रेलवे बोर्ड ने साल 2001 में भी इस नियम को दोहराया था. रेलवे के कई जोन में इस्तेमाल होने वाली लैब 10 mg/dL से कम अल्कोहल की मात्रा का सटीक पता लगाने में सक्षम नहीं हैं.
दरअसल, ड्यूटी के दौरान अल्कोहल की मौजूदगी का पता लगाने के लिए ब्रेथलाइजर टेस्ट किया जाता है. जरूरत पड़ने पर खून के नमूने की जांच भी की जाती है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, कुछ मामलों में शराब नहीं पीने वाले कर्मचारियों के ब्लड सैंपल में भी अल्कोहल की कम मात्रा सामने आ सकती है. ऐसे में गलत रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होने की आशंका जताई गई है.
बिलासपुर ट्रेन हादसे के बाद क्यों उठा यह मुद्दा?
यह मामला 4 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पास हुए ट्रेन हादसे के बाद चर्चा में आया. गेवरा-बिलासपुर MEMU पैसेंजर ट्रेन एक खड़ी मालगाड़ी के पिछले हिस्से से टकरा गई थी. इस हादसे में पैसेंजर ट्रेन के लोको पायलट समेत 12 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 20 लोग घायल हुए थे.
कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे में शामिल ट्रेनों के रनिंग क्रू के ब्रेथलाइजर टेस्ट में अल्कोहल नहीं मिला था, लेकिन खून की जांच में 3 से 10 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर तक अल्कोहल पाया गया. जांच में यह भी सामने आया कि पैसेंजर ट्रेन रेड सिग्नल पार कर गई थी. इसके अलावा, लोको पायलट पहले एक जरूरी एप्टीट्यूड टेस्ट में फेल हुआ था.
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