Railway Cancer Patient Quota: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए ज्यादातर मरीजों को अपने शहर से बाहर किसी बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है. ऐसे समय में अचानक सफर पर जाने की जरूरत पड़ने की वजह से कंफर्म ट्रेन टिकट मिलना एक बड़ी चुनौती बन जाती है. भारतीय रेलवे इन्हीं मरीजों की इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए कैंसर मरीजों और उनके एक सहायक (अटेंडेंट) को इमरजेंसी कोटा के तहत कंफर्म सीट या बर्थ उपलब्ध कराने की सुविधा देता है. आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से...

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कैसे मिलता है इमरजेंसी कोटा का फायदा?

  • इमरजेंसी कोटा के लिए कैंसर मरीज को टिकट बुकिंग के समय आवेदन करना पड़ता है. ऐसे में आवेदन सिर्फ कंप्यूटरीकृत पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर के जरिए किया जा सकता है.
  • इस सुविधा का फायदा सिर्फ मरीज के लिए ही नहीं, बल्कि उसके साथ यात्रा करने वाले एक अटेंडेंट को भी मिल सकती है.
  • आमतौर पर सीट या बर्थ का आवंटन उपलब्धता और यात्रा की जरूरत के आधार पर किया जाता है.

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आवेदन के लिए कौन-से दस्तावेज जरूरी हैं?

  • मरीज को मान्यता प्राप्त सरकारी या प्राइवेट अस्पताल से जारी मेडिकल प्रमाण पत्र जमा करना होगा.
  • प्रमाण पत्र में बीमारी और इलाज से संबंधी सभी जानकारी दर्ज होनी चाहिए.
  • रेलवे अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद ही इमरजेंसी कोटा में सीत दिया जा सकता है.
  • इमरजेंसी कोटा के लिए सभी डॉक्यूमेंट वैलिड होना बेहद जरूरी है.

किस क्लास में कितनी सीटें आरक्षित हैं?

  • फर्स्ट क्लास (FC): 2 बर्थ 
  • एसी 2 टियर (2A): 2 बर्थ 
  • एसी 3 टियर (3A): 2 बर्थ
  • एसी चेयर कार (CC): 2 सीटें 
  • स्लीपर क्लास: 4 बर्थ 

इन बातों का रखें ध्यान

  • इमरजेंसी कोटा का फायदा आपको सिर्फ निर्धारित नियमों और उपलब्धता के आधार पर दिया जाएगा.
  • आवेदन के समय सभी जरूरी मेडिकल डॉक्यूमेंट जमा करना न भूलें.
  • आवेदन जितनी जल्दी जमा करेंगे, सीट मिलने की उम्मीद उतनी ज्यादा होगी
  • यात्रा की आवश्यकता और सीट उपलब्ध होने पर ही कंफर्म बर्थ जारी की जाती है.

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