Indian Railways: भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए त्योहारों या छुट्टियों के दिनों में कन्फर्म सीट पाना बेहद मुश्किल काम होता है. अगर आप भारतीय रेलवे से सफर करते हैं, तो आपने कभी न कभी वेटिंग टिकट जरूर लिया होगा. ऐसे में लोग 'तत्काल कोटा' का सहारा लेते हैं, लेकिन कई बार इसमें भी कन्फर्म सीट न मिलकर TQWL (Tatkal Quota Waiting List) टिकट मिलता है.

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क्यों है ये रेलवे की सबसे मुश्किल वेटिंग कैटेगरी

रेलवे के नियमों में TQWL को सबसे कम प्राथमिकता दी जाती है. जब भी ट्रेन में कोई सीट खाली होती है, तो रेलवे सबसे पहले सामान्य वेटिंग लिस्ट यानी GNWL (General Waiting List) को क्लियर करता है. GNWL के पूरी तरह क्लियर होने के बाद ही TQWL की बारी आती है. ज्यादातर यात्री यह सोचते हैं कि अगर वेटिंग नंबर 1, 2 या 3 है, तो सीट आसानी से मिल जाएगी, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं होता. इसके अलावा, तत्काल कन्फर्म टिकट कैंसिल कराने पर रिफंड न के बराबर मिलता है. यही वजह है कि लोग टिकट कैंसिल नहीं करते और TQWL का ग्राफ आगे नहीं बढ़ पाता. इसी कारण इसे रेलवे की सबसे मुश्किल वेटिंग कैटेगरी माना जाता है.

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चार्ट बनने के बाद क्या होता है टिकट का?

जब तत्काल कोटे की सभी कन्फर्म सीटें भर जाती हैं, तभी TQWL टिकट जारी किया जाता है. नियम के अनुसार, ट्रेन के प्रस्थान समय से लगभग 4 घंटे पहले फाइनल चार्ट तैयार (Chart Preparation) किया जाता है. अगर तब तक आपका TQWL टिकट कन्फर्म नहीं होता, तो इसे यात्रा के लिए अमान्य माना जाता है.

अगर आपने यह टिकट ऑनलाइन (IRCTC ऐप या वेबसाइट) से बुक किया है, तो चार्ट बनने के बाद यह ऑटोमैटिकली कैंसिल हो जाता है. रेलवे क्लर्केज चार्ज काटकर बाकी पैसा सीधे आपके बैंक खाते में वापस भेज देता है. इस तरह के वेटिंग टिकट के साथ रिजर्व्ड कोच में यात्रा करने की अनुमति नहीं होती. यही कारण है कि एक्सपर्ट्स तत्काल में वेटिंग टिकट लेने से बचने की सलाह देते हैं.

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