क्या पति और पत्नी साथ भरेंगे ITR तो ज्यादा होगी बचत, क्या बदलाव करने जा रही सरकार?
Income Tax Return Rules: बजट 2026 से पहले शादीशुदा टैक्सपेयर्स के लिए बड़े बदलाव की चर्चा है. पति पत्नी के साथ ITR फाइल करने का विकल्प आ सकता है, जिससे टैक्स बचत बढ़ सकती है.

Income Tax Return Rules: बजट 2026 से पहले टैक्सपेयर्स के लिए बड़े बदलाव हो सकता है. माना जा रहा है कि सरकार जॉइंट टैक्सेशन का ऑप्शन ला सकती है. जिसमें पति और पत्नी एक साथ ITR फाइल कर सकेंगे. अगर ऐसा होता है तो सिंगल इनकम वाले परिवारों को बड़ा फायदा मिल सकता है.
अभी सिस्टम ऐसा है कि शादी के बाद भी दोनों को अलग अलग टैक्स यूनिट माना जाता है. जिससे एक ही कमाई पर पूरा टैक्स बोझ आ जाता है. नए मॉडल में परिवार को एक इकाई मानने की बात हो रही है. जिससे पति-पत्नी दोनों की बचत बढ़ जाएगी. चलिए आपको बताते हैं सरकार क्या बदलाव करने जा रही है.
जॉइंट टैक्सेशन क्या है?
फिलहाल भारत में पति और पत्नी चाहे शादीशुदा हों. लेकिन टैक्स के मामले में दोनों को अलग अलग व्यक्ति माना जाता है. दोनों ही अपनी अपनी इनकम पर अलग ITR भरते हैं. प्राॅब्लम तब आती है जब घर में सिर्फ एक ही कमाने वाला होता है. मान लीजिए पति की सालाना कमाई 10 लाख है और पत्नी घर संभालती हैं.
ऐसे में पूरे 10 लाख पर टैक्स लगेगा. जबकि पत्नी की बेसिक छूट का कोई इस्तेमाल नहीं हो पाएगा. जॉइंट टैक्सेशन में दोनों की इनकम जोड़ी जाएगी और दोनों की छूट सीमा भी साथ जोड़ी जा सकती है. इससे टैक्स की कैलकुलेशन परिवार की असली फाइनेंशिय कंडीशन के हिसाब से होगी न कि सिर्फ एक कमाने वाले के बोझ पर.
जॉइंट ITR से कैसे बढ़ सकती है टैक्स बचत?
अगर जॉइंट टैक्सेशन लागू होता है. तो इसका सबसे बड़ा फायदा सिंगल इनकम फैमिली को मिलेगा. दोनों की बेसिक छूट लिमिट जुड़ने से टैक्सेबल इनकम अपने आप कम हो जाएगी. इसके अलावा होम लोन के ब्याज, मेडिकल इंश्योरेंस और दूसरे डिडक्शन को भी पति पत्नी मिलकर बेहतर तरीके से एडजस्ट कर पाएंगे.
अभी कई बार एक ही व्यक्ति की इनकम में यह सारी छूट पूरी तरह फिट नहीं बैठती. जॉइंट फाइलिंग में स्लैब भी नए तरीके से डिजाइन किए जा सकते हैं. जैसे दो लोगों के लिए ज्यादा ऊंची छूट सीमा और अलग टैक्स रेट. इससे मिडिल क्लास परिवारों को हर साल अच्छी खासी राहत मिल सकती है.
वर्किंग कपल्स का क्या होगा?
जॉइंट टैक्सेशन के साथ बेसिक छूट सीमा और स्लैब को रेशियो में बढ़ाया जाए. जैसे अभी एक व्यक्ति को 3 लाख तक छूट मिलती है. तो जॉइंट सिस्टम में यह सीमा दोगुनी या उससे ज्यादा हो सकती है. सरचार्ज की लिमिट भी उसी हिसाब से ऊपर ले जाई जा सकती है. जिससे ज्यादा टैक्स का दबाव न पड़े. जहां तक दोनों नौकरी करने वाले पति पत्नी का सवाल है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि उन्हें नुकसान नहीं होना चाहिए. इसलिए सुझाव है कि जॉइंट सिस्टम चुनने पर भी दोनों को अलग अलग स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता रहे. अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में यह मॉडल पहले से चल रहा है. अगर बजट 2026 में यह ऑप्शन आता है तो यह भारतीय टैक्स सिस्टम का बड़ा और पॉजिटिव बदलाव माना जाएगा.
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Source: IOCL


























